Manoranjan
Cinema
Bollywood Bollywood मुंबई. इस बार ऑस्कर पुरस्कार के लिए सर्वश्रेष्ठ विदेशी फिल्म की श्रेणी में भारत की ओर से विधु विनोद चोपड़ा की एकलव्य का चयन किया गया है। एकलव्य के मुकाबले कई बेहतर फिल्में होते हुए भी इस फिल्म के चयन से फिल्म उद्योग के कई लोग नाराज हैं तो ऑस्कर के लिए चयन में राजनीतिकरण का आरोप भी लग रहे हैं।
फिल्म जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि ऑस्कर के लिए एकलव्य का कोई दावा ही नहीं था और ज्यूरी ने किस आधार पर एकलव्य को चुन लिया, इसको लेकर बहस छिड़ गई है। बताया गया है कि एकलव्य और धर्म के बीच अंतिम निर्णय लिया जाना था लेकिन धर्म का चयन नहीं किया गया।
धर्म की निर्देशक भावना तलवार इस निर्णय से काफी नाराज और नाखुश हैं। उन्होंने कहा है कि कब तक ऑस्कर की प्रविष्टि के लिए राजनीतिकरण जारी रहेगा। इस मामले में कोई जिम्मेदारी और पारदर्शिता होना चाहिए। लगान और श्वास को छोड़कर तकरीबन हर साल हमने गलत फिल्म का चयन किया है और निर्णायक अपने एजेंडे को लेकर ही चलते हैं। भावना ने कहा कि ज्यूरी के अध्यक्ष विनोद पांडे ने उनके निर्माता को फोन कर कहा था कि धर्म ऑस्कर एंट्री के लिए प्रबल दावेदार होने के साथ हकदार भी है।
भावना के मुताबिक ज्यूरी के सदस्यों के मत के अनुरूप धर्म का चयन नहीं होने के लिए पांडे ने माफी भी मांगी। कहा जा रहा है कि ज्यूरी ने ऑस्कर एंट्री चुनने के लिए दस फिल्में देखीं और एकलव्य को चुना। यह भी एक तर्क सामने आया है कि एकलव्य का चयन इसलिए किया गया क्योंकि धर्म के निर्माता में ऑस्कर के लिए फिल्म को प्रमोट करने का धन सामर्थय नहीं था।
इसके साथ ही कई लोगों ने ऑस्कर एंट्री के लिए बनाई जाने वाली समिति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। वैसे इस साल जो फिल्में ऑस्कर के लिए दावेदार मानी जा रही थीं उनमें धर्म सबसे ऊपर थी और फिर एकलव्य को टक्कर देने में समर्थ अन्य फिल्में ब्लैक फ्राइडे, पारजानिया, मेट्रो, ब्लू अंब्रेला, गांधी माय फादर और चक दे इंडिया शामिल हैं। इन सभी फिल्मों को दरकिनार कर एकलव्य के चयन का कोई आधार ढूंढ पाना वाकई अटपटा है।
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