अजमेर. पुरानी फिल्मों के गीत सदाबहार हैं और उनको सुनकर ऐसा लगता है, जैसे स्वर्ग में बैठे हों। ये गीत दिल व दिमाग को सुकून देते हैं। यह कहना है
पार्श्व गायिका भाविका परिहार का। वे बुधवार को ‘भास्कर’ से बात कर रही थीं।
संगीत निर्देशक पंडित शिवराम की नाती परिहार ने कहा कि वे लंदन में रहती हैं और वहां पुराने गीत के श्रोताओं की संख्या अधिक हैं। मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर, आशा भौंसले और मुकेश के सदाबहार नगमों की आज भी धूम है। इसके विपरीत यहां लोगों को लाइट म्यूजिक पसंद है। यहां हिमेश रेशमिया स्टाइल के वेस्टर्न टाइप गीत नौजवानों को लुभा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि संस्कृति में बदलाव आ गया है। लता मंगेशकर को आदर्श मानने वाली परिहार ने मधुर कोड़े की फिल्म ‘ट्रैफिक सिग्लन’ में वैशाली सांवत के साथ गीत गाए हैं। टीवी सीरियल ‘मोहल्ला मोहब्बत वाला’ के लिए भी गीत गाए हैं। वे इन दिनों एलबम ‘कमली’ के अगले वॉल्यूम की रिकार्डिंग में व्यस्त हैं।
प्रोत्साहन मिले
क्षेत्रीय भाषई फिल्मों के पाश्र्व गायक प्रकाश चौहान का कहना है कि वे लोग राजस्थानी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने में प्रयास कर रहे हैं। देश के विभिन्न हिस्सों के साथ ही विदेशों में भी अनेक कार्यक्रमों के जरिए राजस्थानी संस्कृति को परवान चढ़ाया जा रहा है, लेकिन राज्य सरकार इन कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए कोई पहल नहीं कर रही है।
उन्होंने कहा कि भोजपुरी फिल्मों की लोकप्रियता ने देश के विभिन्न भागों में बन रही क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों के भविष्य को उज्जवल बना दिया है। राजस्थानी फिल्मों के लिए भी माहौल तैयार हो रहा है। उन्होंने प्रीत न जाने रीत, भौमली और जय मां करवा चौथ में गीत गाए हैं।
जियारत की
भाविका और प्रकाश ने ख्वाजा साहब की मजार पर मखमल की चादर और अकीदत के फूल पेश कर कामयाबी की मन्नत मांगी। उन्हें खादिम सैयद कुतुबुद्दीन सखी ने जियारत कराई।