
जालंधर. गर्भ में बेटियों को कत्ल करने के लिए सुर्खियों में रहने वाला पंजाब अब नवजातों की खरीद-फरोख्त का भी केंद्र बनता जा रहा है। अनचाही संतानें बेची और खरीदी जा रही हैं। यह गोरखधंधा छोटे-बड़े और निजी अस्पतालों के जरिए हो रहा है। भास्कर टीम ने ऐसे एक मामले का खुलासा किया।
24 सितंबर रिपोर्टर : हैलो, मैंने अखबार में बच्ची गोद लेने के लिए ऐड पढ़ा है।
इंदिरा : हां जी
रिपोर्टर : जी, मुझे चाहिए।
इंदिरा : आपके बच्चा नहीं है?
रिपोर्टर : नही
इंदिरा : क्यों?
रिपोर्टर : काफी इलाज कराया, नहीं हुआ। डॉक्टर ने बोला है कि 7 लाख लगेगा, मेरे पास इतने रुपए नहीं हैं। इससे अच्छा तो मैं कोई बच्चा ही गोद ले लूं।
इंदिरा : शादी को कितने साल हुए?
रिपोर्टर: सात साल
इंदिरा : पति क्या करते हैं?
रिपोर्टर: मुंबई में शिपिंग कंपनी में हैं, मैं जालंधर में सास के साथ रहती हूं। सहदेव ट्रैवल कंपनी में जॉब करती हूं।
इंदिरा : पैसे से तो ठीक-ठाक लगते हो, मिलकर बात कर लेते हैं।
रिपोर्टर: कैसी बात, क्या कुछ पैसे भी देने पड़ेंगे?
इंदिरा : हां, 34-35 हजार।
रिपोर्टर: ठीक है, कहां आऊं?
इंदिरा : फगवाड़ा बस स्टैंड पर आकर फोन करना। कल ठीक 12.00 बजे मिलते हैं। किसके साथ आओगी?
रिपोर्टर: भाई के साथ
25 सितंबर : (इंदिरा ने हमें शाम 4 बजे बुलाया)
रिपोर्टर : हम फगवाड़ा पहुंच गए हैं, आप कहां हैं?
इंदिरा : बस डेढ़ मिनट में आपके पास पहुंच गए, आपके पास क्या है?
रिपोर्टर : हम सफेद लांसर में हैं, नंबर है 2123
(डेढ़ मिनट कहते-कहते यह लोग ग्रे रंग की सैंट्रो में पौने घंटे बाद आए।)हमारी कार के बाहर इंदिरा आई, मैंने पूछा आपसे बात हुई थी मेरी)
इंदिरा : हां जी
रिपोर्टर : आइए गाड़ी में ही बैठकर बात कर लें
रिपोर्टर: यह दोनों मेरे भाई हैं, मेरी सास ने कहा कि पहले तुम लोग बच्ची देख आओ।
रिपोर्टर : कितने दिन की बच्ची है?
इंदिरा : उस दिन कृष्ण भगवान का जन्मदिन था।
रिपोर्टर: आप लोग क्या काम करते हैं?
इंदिरा : हम लोग क्लीनिक पर काम करते हैं। यह लोग हमारे पास केस के लिए आए थे। केस बिगड़ा हुआ था तो इसका ऑपरेशन कहीं और से करवाया। इनके एक रिश्तेदार ने कहा है कि हम बच्ची ले लेंगे, लेकिन कुछ महीने के बाद। लेकिन परिवार वाले इसे पाल नहीं सकते हैं। एक और परिवार भी लेना चाहता है लेकिन वह गरीब हैं। कंजक देवी है, हम महामाई को मानते हैं। नहीं चाहते कि बच्ची गलत जगह जाए।
रिपोर्टर: वह लोग क्या करते हैं?
इंदिरा : करिआना की दुकान है।
रिपोर्टर: बच्ची देना क्यों चाहते हैं?
इंदिरा : उनके पहले से तीन बेटियां और एक बेटा है।
रिपोर्टर: मेडिकल करवाया है बच्ची का?
इंदिरा : हां, करवाया है, चीज सुंदर और स्वस्थ है।
इंदिरा: आपको जहां तसल्ली है वहां दिखा लें, हमारी तरफ से ओके है।
रिपोर्टर : जीजा जी को बच्ची का फोटो दिखाना है, फोटो खींच लेते हैं।
रिपोर्टर: अच्छा पैसे की बात बताएं
मंजीत : (इंदिरा का साथी) 33-34 हजार अस्पताल का खर्चा, थोड़ा-बोत अगले ने खर्चा ले लेना है, यानी 60-65 हजार लग जाएगा।
रिपोर्टर: हमें लड़का भी मिल जाएगा
इंदिरा: लड़के तो बहुत महंगे हैं।
रिपोर्टर: कितने के
इंदिरा: चार लाख तक
रिपोर्टर: नहीं हमारी तो बेटी की इच्छा है।
इंदिरा: आप हमें रात तक बता दें।
रिपोर्टर: लड़का कम से कम कितने का होगा।
इंदिरा : फिलहाल तो है नहीं लड़का
रिपोर्टर: ठीक है 75 में फाइनल हुआ।
इंदिरा: हां, हम बच्ची लेकर आए हैं, आप तसल्ली भी कर लें।
हमारी कार से काफी दूरी पर खड़ी एक सैंट्रो कार में आगे ड्राइवर बैठा है और पीछे एक महिला बच्ची को तौलिए में लपेटकर बैठी है। मंजीत बच्ची को लेकर आता है। हमने फौरन उसके फोटो कर लिए व उसे कार में लेकर बैठ गए।
रिपोर्टर: हां, अब आप फाइनल पैसे बताएं।
इंदिरा: 33-34 हजार डिलीवरी पर खर्च आया।
रिपोर्टर: कहां हुई डिलीवरी।
इंदिरा: लुधियाना और यह लोग फिल्लौर के पास के हैं।
रिपोर्टर: 35,000 डॉक्टर का और बाकी पैसे घरवालों के।
इंदिरा : कुछ घरवाले लेंगे, आपका 75 लगेगा और एक मिठाई का डिब्बा।
रिपोर्टर: पहले भी आपने बच्चे दिए हैं कभी?
मंजीत: ऐसा हमेशा नहीं होता है, केस पर डिपेंड करता है।
इस तरह किया मामला उजागर
23 सितंबर की रात जालंधर से प्रकाशित एक अखबार में हमने एक विज्ञापन पढ़ा जिसमें लिखा था कुछ दिन की बच्ची गोद लेने के इच्छुक 9855055.पर संपर्क करें। इस तरह का विज्ञापन पढ़ हमें कुछ शक हुआ। क्योंकि जो बच्ची पाल नहीं सकते वह उसे अनाथ आश्रमों में छोड़ देते हैं। हमने फोन पर बात की। फोन पर इंदिरा ने हमसे कुछ जानकारी ली कि आप कौन हैं और क्या करते हैं।
बच्ची के लिए फोन पर 34000 रुपए तय हुए थे। 24 सितंबर को फगवाड़ा के बस स्टैंड पर बच्ची देखने और फाइनल डील के लिए बातचीत तय हो गई। जहां इन्होंने हमसे 75000 रुपए मांगे व लड़के की मांग पर लाखों रुपए की बात की। हमने पत्रकारिता के उसूलों को ध्यान में रखते हुए और सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वाह करते हुए पुलिस को भरोसे में लिया।
सारे प्रकरण की जानकारी आईजी संजीव कालड़ा को दी। उन्होंने तत्काल पूरे मामले की जिम्मेवारी एसपी सिटी-1 एस.के. कालिया को दी। पुलिस भी तुरंत हरकत में आई। हम पर शक होने की वजह से 25 सितंबर की दोपहर के बाद बच्च बेचने वालों ने अपना मोबाइल बंद कर दिया। 26 सितंबर को उनके मोबाइल के जरिए पुलिस उन तक पहुंच गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
मामला दर्ज
बुधवार शाम लगभग 6 बजे इंदिरा और उसके पति मंजीत को गिरफ्तार कर लिया गया। उनके खिलाफ थाना फिल्लौर में आईपीसी की धारा 373, 372, 317, 120-बी के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस कंट्रोल रूम में इंदिरा ने अपना अपराध कबूल करते हुए माफी मांगी।
सच क्या है
इंदिरा ने बताया था कि बच्ची का परिवार फिल्लौर का रहने वाला है और डिलीवरी लुधियाना में हुई है। ये लोग गरीब हैं और पालन-पोषण नहीं कर सकते हैं, जबकि पुलिसिया पूछताछ में सच कुछ और ही निकला। इस नवजात बच्ची का पिता बीते 11 महीने से विदेश में रह रहा है। उसके पीछे से यह बच्ची हुई। इसकी मां बंगा के पास एक गांव की रहने वाली है और फिल्लौर स्थित इंदिरा के पति के क्लीनिक पर उसने डिलीवरी करवाई।
जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने बच्ची को बेचने वालों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस पकड़े गए दोनों लोगों से पूछताछ कर रही है।—सुरेंद्र कुमार कालिया, एसपी(सिटी), जालंधर
भास्कर ने पत्रकारिता के मूल्यों का पालन करते हुए हमें इस गिरोह के बारे में सूचित कर उदाहरण पेश किया है। मामले की गहराई से जांच की जाएगी।—संजीव कालड़ा, आईजी, जालंधर जोन