बीकानेर. रेतीले धोरों का शहर अब सैलानियों को इतना भाने लगा है कि बीकानेर में ठहराव बढ़कर एक-एक सप्ताह का हो गया है और पर्यटन उद्योग का टर्नओवर
70 करोड़ रुपए सालाना हो चुका है।
अचानक आए इस बूम की वजह सिर्फ पर्यटकों का ठहराव है जो यहां के ट्रेवल एजेंट, सफारी ऑपरेटर और हस्तशिल्पियों के बूते संभव हुआ है। अगर शहर की दशा सुधर जाए तो पर्यटकों को ठहराव और बढ़ सकता है। पर्यटन व्यवसायियों का मानना है कि एंटीक के नाम पर सर्वाधिक उत्सुक रहने वाले पर्यटको के लिए बीकानेर में इतना कुछ है जितना राजस्थान के दूसरे हिस्से में नहीं है और अगर यह सब पर्यटन के नक्शे में चढ़ जाए तो पर्यटक बार-बार आए।
उल्लेखनीय है कि बीकानेर का पर्यटन व्यवसाय पिछले दो साल में ही इतना तेजी से बढ़ा है। इसकी वजह भले ही दूसरे पर्यटक क्षेत्रों के प्रति पर्यटको की मानी जा लेकिन इससे भी बड़ी बात है यहां की शानदार हवेलियां, ग्राम्य जीवन और और खान-पान है जो पर्यटकों को गहरे तक प्रभावित करता है। हालात ये हैं कि यहां की दस होटलों का टर्न-ऑवर डेढ़ से दो करोड़ हो चुका है। सालाना 20 से 22 लाख के टर्न-ओवर वाली 50 होटलें हैं। इन सभी के अलावा दूसरी होटलें व गेस्ट हाउस भी हैं जो शानदार व्यवसाय कर रहे हैं।
हालांकि यहां सैलानियों को लाने का सारा दारोमदार एक दर्जन ट्रेवल एजेंसियों के नाम है जिन्होंने सैलानियों को बीकानेर लाने के लिए लगातार प्रयास जारी रखे हैं लेकिन इस के अलावा होटलों में मिलने वाला सत्कार और हस्तशिल्प ऐसे हैं जो पर्यटकों को बार-बार यहां आने के लिए प्रेरित करते हैं। तथ्य यह है कि हैंडी-क्राफ्ट के शो-रूम हर साल पांच करोड़ रुपए का कारोबार कर रहे हैं। पर्यटन उद्योग के पनपने की वजह से यहां रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। सामान्य ऊंटगाड़े और तांगे वाला रोजाना 100 से 300 रुपए तक कमा रहा है। गाइडों को रोजगार मिला है।
* बीकानेर में जिस तेजी से सैलानियों का रुझान बढ़ रहा है उसे देखते हुए आने वाले समय में पर्यटन उद्योग और तेजी से पनपेगा। सैलानियों के लिए नए पर्यटन स्थल विकसित करने का प्रयास तेज कर दिया गया है। सागर की छतरियों के बाद अब कोलातय के विकास की प्लानिंग की जा रही है।
-एच.एम.आर्य, सहायक निदेशक पर्यटन