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मध्यावधि चुनाव की आहट यूपीए-वामपंथी अड़े

नई दिल्ली.एटमी करार पर यूपीए और वाम दलों के बीच सवाल-जवाब का सिलसिला बदस्तूर जारी है, लेकिन दोनों के मध्य गतिरोध खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। ‘सौ दिन चले अढाई कोस’ के इन सियासी हालात में देश मध्यावधि चुनाव की ओर खिसक रहा है।वाम नेताओं के मुताबिक करार पर शंकाओं और आपत्तियों के निवारण के लिए गठित साझा समिति की अगली बैठक पांच अक्टूबर को होगी, लेकिन दोनों ही पक्षों के टस से मस नहीं होने की स्थिति में संवाद का कोई ठोस नतीजा शायद ही निकले।

भाकपा के राष्ट्रीय सचिव डी राजा ने करार पर अमल की दिशा में सरकार की तरफ से पर्दे के पीछे चल रही गतिविधियों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे विवाद निबटाने के लिए गठित राजनीतिक तंत्र पूरी तरह अप्रांसगिक हो जाएगा।

नोट्स का आदान-प्रदान : करार पर आपत्तियों को लेकर वाम दलों के १२ पेज के दूसरे नोट पर यूपीए ने मंगलवार को उन्हें १४ पेज का दूसरा जवाबी नोट भेज दिया, लेकिन हाइड एक्ट की फांस अब तक बनी हुई है। चारों वाम दल जवाबी नोट मिलने के साथ ही इस पर बिंदु वार जवाब तैयार करने में जुट गए हैं और साझा समिति की अगली बैठक से पहले यह जवाब यूपीए को भेज दिया जाएगा।

कोलकाता की बैठकों पर टिकी निगाहें : सत्ता शिविर हो या प्रतिपक्षी कुनबा, सबकी निगाहें शुक्रवार से कोलकाता में शुरू होने जा रही राजनीतिक तौर पर माकपा की बेहद संवेदनशील बैठकों पर टिकी हैं। वाम मोर्चे के बाकी दलों के लिए भी माकपा पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी की बैठकों से निकलने वाले नतीजे अहम होंगे क्योंकि इसके आधार पर ही एटमी करार पर वाम मोर्चे का रुख तय होगा।

क्या है सियासी अहमियत :* ये बैठकें उस वक्त हो रही हैं जब करार पर सरकार से नाता तोड़ने के सवाल पर खुद माकपा नेतृत्व के भीतर से अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे हैं। बुद्धदेव भट्टाचार्य और ज्योति बसु की कुछ टिप्पणियों पर खुद माकपा महासचिव प्रकाश करात को सफाई देनी पड़ी है।

* करार पर सरकार के जवाबों को वामदल सिरे से खारिज कर चुके हैं। पांच अक्टूबर को साझा समिति की बैठक में वामदल क्या तेवर अपनाएंगे, यह भी इन्हीं दोनों बैठकों में तय होगा।

तो फिर सरकार से खींच लेंगे हाथ : करार पर वामदलों की तमाम आपत्तियों के बावजूद सरकार यह बात लगातार कह रही है कि आईएईए में बातचीत का सिलसिला जल्द शुरू होगा। इसके जवाब में माकपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अगर सरकार ने हमारी चेतावनी की अनदेखी करते हुए आईएईए में बातचीत की प्रक्रिया शुरू की तो हम सरकार से अलग हो जाएंगे।हम अपने इस स्टैंड से एक इंच भी आगे-पीछे नहीं हुए हैं।





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