जोधपुर. बताइए मिस्टर कलेक्टर, शहर की ऐसी हालत क्यों है? पंद्रह अगस्त के बाद सब कुछ ठप क्यों हो गया है? ..सर, काम तो हुआ है और हो रहा है।
बारिश और कुछ अन्य वजह से देरी हो रही है।..काम हो रहा है तो नजर क्यों नहीं आ रहा? आम आदमी बेहाल है, शहर की बुरी गत हो रही है और फिर भी विकास का दावा किया जा रहा है? आखिर कहां है विकास? क्या केवल महेन्द्र नाथ अरोड़ा सर्किल से सेनापति भवन सर्किल तक? राज्य की न्यायिक राजधानी में जब हाईकोर्ट कॉलोनी दुर्दशा की शिकार है तो बाकी शहर का क्या हाल होगा? इन टिप्पणियों में शहर की दुर्दशा पर नाराजगी जताते हुए न्यायाधीश गोविंद माथुर ने हाईकोर्ट में पेश हुए कलेक्टर नरेशपाल गंगवार को निर्देश दिए हैं कि दीपावली के पर्व को देखते हुए जर्जर सड़कों की मरम्मत के साथ नियमित साफ-सफाई, आवारा पशुओं सहित शहर को असुविधाजनक स्थितियों से निजात दिलाई जाए।
हाईकोर्ट ने 18 सितंबर को एनएस पब्लिसिटी एजेंसी की ओर से दायर याचिका में 23 अक्टूबर तक अवैध व जान जोखिम में डालने वाले हर्ो्िडग्स हटाने के आदेश के साथ शहर में व्याप्त कई तरह के पब्लिक न्यूसेंस को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर व नगर निगम के सीईओ को कोर्ट में हाजिर होने का हुक्म दिया था। इसकी पालना में बुधवार को कलेक्टर गंगवार तथा निगम के सीईओ कृष्ण कुणाल ने सड़क निर्माण व मरम्मत, सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट, आवारा पशुओं की समस्या, सीवरेज तथा हर्ो्िडग्स हटाने को लेकर अब तक किए गए व प्रस्तावित कार्र्यो की रिपोर्ट पेश की।
ट्रैफिक मैनेजमेंट अस्त-व्यस्त
न्यायालय ने कहा कि महेन्द्रनाथ अरोड़ा सर्कल पर गौरव पथ के नाम पर ऐसा आइलैंड बना दिया गया है, जो दुर्घटना की वजह बन सकता है। शहर की व्यस्ततम सरदारपुरा बी रोड पर पार्किग के लिए कोई इंतजाम नहीं है। इससे पहले भी हाईकोर्ट ने महेन्द्र लोढ़ा बनाम राज्य सरकार याचिका में कई दिशा-निर्देश दिए थे, लेकिन उनकी पालना में ठोस प्रयासों का अभाव झलकता है। ट्रैफिक मैनेजमेंट व्यवस्थित नहीं होने से जोखिम की स्थितियां बनी हुई है। लोग बिना हेलमेट वाहन चला रहे हैं और सिटी बसें बेलगाम हो रही हैं। आवारा पशुओं की समस्या बहुत ज्यादा परेशानी पैदा कर रही है, लेकिन इसका कोई हल नहीं है। सड़कों पर इतने गड्ढ़े हैं कि आम आदमी का चलना मुश्किल हो गया है।
15 अक्टूबर तक सुधार का यकीन दिलाया
निगम के सीईओ कुणाल ने सुनवाई के दौरान कहा कि डोर-टु-डोर वेस्ट कलेक्शन की प्रायोगिक व्यवस्था हाउसिंग बोर्ड में की गई थी, लेकिन ठेकेदार के सहयोग के अभाव में वह सफल नहीं हो पाई। अब दिल्ली मॉडल पर ऐसे वार्डे में इसे लागू करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जो सघन आबादी वाले हैं। उम्मीद है कि 15 अक्टूबर तक इसके सकारात्मक नतीजे सामने आएंगे। कुणाल ने मालवीय नगर में नाला निकासी के हाईकोर्ट के पूर्ववर्ती आदेशों की पालना के लिए भी वस्तुस्थिति रखते हुए कहा कि इसके लिए यूनिवर्सिटी के भीतर से कवर्ड नाला निकाले जाने की योजना है।
न्यायाधीश माथुर ने प्रशासन व निगम की संयुक्त रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर व निगम सीईओ को 23 अक्टूबर तक आवश्यक कदम उठाते हुए रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।
आबादी बढ़ी, सुविधाएं नहीं
न्यायालय ने कहा कि आबादी के लिहाज से भले ही जोधपुर राज्य का दूसरा बड़ा शहर हो गया है, लेकिन जनसुविधाओं के मामले में यह अब भी पिछड़ा हुआ है। राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस तक रात-दिन सड़कों पर काम चलता रहा, लेकिन उसके बाद जनता को हो रही तकलीफों को लेकर किसी को फिक्र तक नहीं है। यहां तक कि विश्व की नामचीन टूरिस्ट गाइड में जोधपुर को लेकर की गई नकारात्मक टिप्पणियां यहां व्याप्त अव्यवस्थाओं की ओर इशारा कर रही है।
कलेक्टर ने दी सफाई
सुनवाई के दौरान कलेक्टर गंगवार ने कहा कि बारिश होने और रामदेवरा मेले में सफाईकर्मियों के छुट्टी पर चले जाने से कुछ समय के लिए काम बाधित हुए हैं। अब इन्हें चरणबद्ध तरीके से पूरा करवाया जा रहा है। गौरव पथ का काम भी 30 नवंबर तक पूरा करने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा भी शहर की अन्य सड़कों को चौड़ा कर उन्हें विकसित करने के काम हाथ में लिए गए हैं। आखलिया से चौपासनी तक सड़क चौड़ी की गई है।
गंगवार ने कहा कि लोगों में सिविक सेंस नहीं होने से आवारा पशुओं समेत निर्माण कार्र्यो को नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। इस कारण लोगों को इसका पूरा फायदा नहीं मिल रहा है। डिवाइडर को लोग जगह-जगह अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए तोड़ रहे हैं। मामले भी दर्ज करवाए गए हैं। डिवाइडर सही करने के साथ लोगों को समझाने के प्रयास किए जाएंगे।