मुंबई: ट्वेंटी-20 वर्ल्डकप क्रिकेट में भारतीय टीम की ऐतिहासिक सफलता का दिग्गज बल्लेबाजों सचिन तेंडुलकर, सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ के भविष्य के लिए क्या संकेत मिलता है? अब यह सवाल बहस के केंद्र में है। टूर्नामेंट में इन त्रिमूर्तियों की गैरमौजूदगी में महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व में टीम ने जिस तरह प्रदर्शन किया, वह काबिले तारीफ है।
चारों ओर इस युवा टीम के प्रदर्शन की ही चर्चा हो रही है। सवाल यह है कि क्या अब टीम में व्यापक फेर-बदल का वक्त आ चुका है। इस बहस को धोनी के वक्तव्य से और ज्यादा बल मिला है, जिसमें उन्होंने कहा है कि इस टीम के कुछ खिलाड़ियों को वनडे टीम में स्थान मिलना ही चाहिए।
यह बात धोनी ने फाइनल मैच के बाद कही थी। इसलिए इसका गहरा अर्थ है। उनका यह वक्तव्य इस बात की ओर भी संकेत करता है कि टीम का उन्हें पूरा सहयोग मिला। इससे क्रिकेट को स्थापित करने की दिशा में नई पहल की शुरुआत की जा सकती है।
चयनकर्ताओं में है मतभिन्नतारोचक तथ्य यह है कि चयन समिति के दो सदस्यों ने परस्पर विरोधी टिप्पणी की है। एक सदस्य ने कहा, ‘ट्वेंटी-20 वनडे और टेस्ट क्रिकेट से बहुत भिन्न है। अनुभव को नकारना संभव नहीं है और न ही उचित।’ इससे अलग दूसरे चयनकर्ता ने कहा, ‘ट्वेंटी-20 वल्र्डकप की इस सफलता से युवाओं को आजमाने के हमारे विचार को बल मिला है। कुछ खास कारणों से ही इन प्रतिभाशाली क्रिकेटरों को टीम में जगह नहीं मिल पा रही थी।’ ये चयनकर्ता ऐसी बातें करते समय अपने नाम का खुलासा भी नहीं करना चाहते हैं। यह एक अजीब बात है, जो बोर्ड के गैरपेशेवर रवैये को दर्शाता है।
समय के साथ चलें आम लोगों की बात करें तो तमाम एसएमएस, इंटरनेट, टेलीफोन काल में अधिकांश का कहना है कि टीम इंडिया को अब भविष्य की तैयारी करना चाहिए। इन युवाओं को ही मुख्य टीम में मौका मिलना चाहिए। लेकिन कुछ चयनकर्ताओं और पूर्व क्रिकेटरों की राय भिन्न है। पूर्व कप्तान रवि शास्त्री कहते हैं, ‘जल्दबाजी में कुछ भी नहीं किया जाना चाहिए। हमें समय से तेज भी नहीं चलना चाहिए।’
सचिन, सौरव, द्रविड़ महानपूर्व सलामी बल्लेबाज नवजोत सिंह सिद्धू कहते हैं कि ट्वेंटी-20 से पुराने व दिग्गज क्रिकेटरों के कैरियर पर कोई खतरा नहीं है। ये (सचिन, सौरव, द्रविड़) अनुभवी क्रिकेटर हैं और उन्होंने देश में क्रिकेट को बहुत कुछ दिया है। किसी को दूसरे से तौला नहीं जा सकता। वे महान क्रिकेटर हैं और उनका अपना एक स्थान है, जहां से उन्हें कोई डिगा नहीं सकता।’ इस बारे में पूर्व चयनकर्ता प्रमुख सैयद किरमानी ने कहा,‘युवा टीम की यह महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
साथ ही सचिन तेंडुलकर, राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली को टेस्ट और वनडे से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। टीम को इनके अनुभव का पूरा फायदा मिलना चाहिए। यह ऐसा समय है, जब चयनकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। कई बार ऐसा हुआ है कि चयनकर्ता प्रतिभाशाली क्रिकेटरों को टीम में शामिल नहीं कर सके हैं। आगे ऐसा नहीं होना चाहिए।’
वास्तविक क्रिकेट टेस्ट हीपूर्व कप्तान अजित वाडेकर कहना है कि सचिन, सौरव और द्रविड़ महान खिलाड़ी हैं। फटाफट क्रिकेट युवाओं के लिए ज्यादा फिट है। लेकिन क्रिकेट का वास्तविक मजा तो टेस्ट मैच में ही है और इसमें इन अनुभवी क्रिकेटरों की भूमिका अहम होती है। नि:संदेह युवा टीम ने शानदार प्रदर्शन किया है और नया इतिहास रचा है।
भविष्य में वनडे और टेस्ट टीम कैसी हो, इस सवाल पर पूर्व चयनकर्ता प्रमुख चंदू बोर्डे यह तो कहते हैं कि ट्वेंटी-20 वल्र्डकप जिताने वाले युवा क्रिकेटरों को मौका मिलना चाहिए, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ते हैं कि युवा और अनुभवियों को लेकर टीम को संतुलित बनाने का काम चयनकर्ताओं का है और इस बारे में वे कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।