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स्टाफ वही, बिजलीघर कई

कोटा. बिजली उत्पादन निगम ने इंजीनियरों के पलायन को रोकने के लिए ऐच्छिक सेवानिवृत्ति पर अघोषित रोक लगा दी है। उधर, नए बिजलीघरों को चलाने के powerलिए पुराने बिजलीघरों से स्टाफ को इधर से उधर भेजा रहा है।

विद्युत उत्पादन निगम सूत्रों का कहना है कि निगम से पलायन को रोकने के लिए ऐच्छिक सेवा चाहने वालों को अब निगम से मंजूरी मिल पाना संभव नहीं है। अभी छह से अधिक इंजीनियरों ने उत्पादन निगम को छोड़ने के लिए वीआर की अर्जी लगा रखी है।

इंजीनियर्स का कहना है कि पलायन की मुख्य वजह घटते पद और बढ़ता वर्क लोड है। कोटा थर्मल में पांचवीं यूनिट के निर्माण के बाद से पिछले आठ साल में कोई नई भर्ती नहीं हुई है। पुराने स्टाफ के बल पर यहां छठी इकाई का निर्माण कराया गया और अब सातवीं इकाई का कार्य भी उन्हीं इंजीनियरों के बल पर चल रहा है। इतना ही नहीं सूरतगढ़ थर्मल (विस्तार), धौलपुर व छबड़ा थर्मल स्टेशन के निर्माण एवं संचालन की जिम्मेदारी का निर्वाह भी कोटा थर्मल से भेजे गए इंजीनियरों के हवाले है। इस दौरान कोटा थर्मल में रिक्त हुए पद आज भी खाली पड़े हैं।

जेईएन के पदों की नई भर्ती की योजना भी सफल नहीं हो पाई है। निगम ने साढ़े छह हजार रुपए में भर्ती करने की योजना बनाई थी, लेकिन निजी कंपनियों में मोटी पगार की वजह से कई इंजीनियरों ने नौकरी को ज्वाइन ही नहीं किया। ऐसे में स्थिति जस की तस बनी हुई है। उधर, निगम के करीब 50 इंजीनियर नौकरी छोड़कर अच्छे पैकेज पर निजी कंपनियों को ज्वाइन कर चुके हैं।

* उत्पादन निगम के अध्यक्ष से कई बार आग्रह किया है कि रिक्त पदों को भरा जाए। थर्मल में ऑपरेटर व तकनीकी कर्मचारियों को करीब 15 प्रतिशत पद रिक्त पड़े हैं। चौथी इकाई के बाद इन पदों पर कोई नई भर्ती नहीं हुई। उसी स्टाफ को नई इकाइयों की जिम्मेदारी भी वहन करनी पड़ रही है।’
—राजेन्द्र सिंह, अध्यक्ष, थर्मल कर्मचारी संघ, इंटक

* थर्मल में कई पद रिक्त हैं। भर्ती के संबंध में उच्च स्तर पर ही कोई निर्णय होता है। पदों के रिक्त रहने से कुछ समस्या आती है।’
—टीके बरडिया, मुख्य अभियंता थर्मल





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