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Shekhawati Shekhawati झुंझुनूं. इस बार के विश्व पर्यटन दिवस की थीम ‘पर्यटन में महिलाओं के लिए खुले द्वार’ को झुंझुनूं यूनाइटेड नेशंस वर्ल्ड टयूरिज्म आरगेनाइजेशन की महिलाओं ने
साकार करने का बीड़ा उठाया है। जिले की कुछ महिलाएं तो इस क्षेत्र में अच्छा कार्य पहले से ही कर रही हैं। पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोग इसमें आशा की नई किरण खोज रहे हैं।
जिले में कुछ महिलाएं विदेशी पर्यटकों को कुकिंग व क्राफ्ट सिखा रही हैं तो कुछ हैंडीक्राफ्ट के आइटम महिलाओं के ग्रुप द्वारा तैयार कर पर्यटकों को बेच रही हैं। विदेशी पर्यटकों में महिलाओं की संख्या आधे से ज्यादा होने के कारण शेखावाटी की महिलाओं और पर्यटक महिलाओं में भी इंटरक्शन बढ़ा है। ‘घर बैठे काम और अच्छे मिले दाम’ की यह उक्ति इस मामले में जिले की ग्रामीण महिलाओं के साथ स्टीक बैठक रही हैं।
उत्साहित हैं महिलाएं
नूआं गांव के सत्यम शिवम सुंदरम संस्थान की अनीता राजावत विदेशी पर्यटकों के लिए हैंडीक्राफ्ट के आइटम तैयार करने के प्रति उत्साहित है। इसके लिए उन्होंने एक सौ से अधिक महिलाओं को ट्रेनिंग भी दी है। उनके द्वारा तैयार कलात्मक गुदड़ी, बेडशीट, पिलोकवर, कढ़ाई के स्कर्ट, वाल हैंगर आदि को पर्यटकों ने काफी पंसद किया है। अनीता ने इनके एक्सपोर्ट से भी कमाई का जरिया ढूंढ़ा है। जमुना रिसोर्ट में वाणी जांगिड़ विदेशियों को भारतीय व्यंजन बनाना, आदि काम सिखा रही हैं। अनीता राहड़ महिला स्वयं सहायता समूह के माध्यम से हैंडीक्राफ्ट के नमूने तैयार कर इस रोजगार से महिलाओं को पैरों पर खड़ा होने की प्रेरणा दे रही है।
गांव की गलियों में लंदन की गोरी
ओपन आर्ट गैलेरी घूमने आने वाले पर्यटक केवल हवेलियां, फ्रेस्को पेंटिंग्स और बावड़ियां देखकर ही खुश नहीं होते। वे ग्राम्य शेखावाटी की असली तस्वीर देखने के लिए गांव-ढाणियों में दस्तक देने लगे हैं। माना जाता है कि एक विदेशी पर्यटक 10 लोगों को रोजगार देता है, इस लिहाज से फॉर्म ट्यूरिज्म भविष्य के लिए शुभ संकेत है। शाही ठाठ-बाट वाली दिखावटी खातिर-तवज्जो की बजाए उन्हें गांव की अपनत्व भरी मेहमाननवाजी कहीं ज्यादा भाने लगी है।
मेमनों से खेलना, कुट्टी काटने की मशीन चलाना या चूल्हे में फूंकनी मारना उन्हें रोमांच से भर देता है तो सुरंगा लहरिया, लहंगा, हाथ में लाख या कांच की हरी-हरी चूड़ियां तो पांव में मोचड़ियां पहनकर इतराना उन्हें खुश कर देता है। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोग पर्यटकों के लिए इस तरह के ट्यूर अरेंज करने लगे हैं। इसके अलावा पर्यटकों को भारतीय रसोई में हाथ आजमाना भी खूब भाता है।
पर्यटन विशेषज्ञ लक्ष्मीकांत जांगिड़ का कहना है कि ‘बदलते ट्रेंड में विदेशी मेहमान अब हवेलियां और फ्रेस्को पेंटिंग्स से हटकर भी नया देखना चाहते हैं। वे चटपटे भारतीय मसालों से बने देशी खाने के प्रति हद तक दिवानगी दिखाने लगे हैं. इसीलिए पैकेज में भारतीय रसोई और ग्रामीण इलाकों में ट्यूर को विशेष रूप से शामिल किया है।’ विदेशी पर्यटकों में ग्राम्य भारत के दर्शन की उत्सुकता बढ़ते देख होटल व्यवसायी भी गांव-ढाणियों में अपने कोन्टेक्ट बढ़ाने लगे हैं।
विदेशी गांवों में संयुक्त परिवार, बुजुर्गो के सम्मान में महिलाओं के घूंघट निकालने और एक चूल्हे पर कई महिलाओं की भागीदारी देख वे अचंभे में पड़ जाते हैं। भारतीय खाने की तरह चटपटी यादें लेकर जाते वक्त अक्सर पर्यटक यही कहते हैं ‘आई विल कम अगेन नेक्सट इयर इट्स माई प्रोमिस..।