Manoranjan
Cinema
Bollywood Bollywood परदे के पीछे.
देव आनंद के 84 वें जन्मदिन पर उनकी आत्मकथा ‘रोमांसिंग विद लाइफ’ का विमोचन हुआ। इस यादगार अवसर पर उन्होंने गुरुवार को एक दावत भी दी है, जिसमें फिल्म उद्योग के सभी नामी लोगों को आमंत्रित किया गया है। देव आनंद के जीवन में अनेक लड़कियां आई हैं और उन्होंने अत्यंत साफगोई से अपने प्रेम प्रकरणों का विवरण प्रस्तुत किया है।
अब खबर है कि 426 पृष्ठों वाली 695 रुपए मूल्य की इस किताब में प्रेम और सेक्स के विषय में स्पष्ट बातें लिखी गई हैं। वाइकिंग द्वारा प्रकाशित यह किताब बाजार में उपलब्ध है। देव आनंद ने सुरैया और जीनत अमान से अपना इश्क स्वीकार किया है। सुरैया ने परिवार वालों के दबाव और अम्मी की खुदकुशी की धमकी की वजह से देव आनंद द्वारा पहनाई अंगूठी को बड़े भारी हृदय से समुद्र में डाल दिया। इस असफल प्रेम के कारण देव आनंद के मन में खुदकुशी का विचार भी आया था।
उन्होंने अपने और कल्पना कार्तिक के प्रेम और विवाह का विवरण भी साफगोई से प्रस्तुत किया है। साथ ही संकेत दिया है कि अपनी पत्नी की शराबनोशी के कारण उनके बीच तनाव रहा है। उनकी पत्नी की इस बारे में क्या राय है, यह तो किसी को ज्ञात नहीं है, परंतु देव आनंद के प्रेम प्रकरण ही तनाव के असली कारण हो सकते हैं। अगर पति और पत्नी दोनों की आत्मकथा साथ में प्रकाशित हो, तो पाठक अपना निर्णय ले सकते हैं।
यह अजीब इत्तेफाक है कि हाल ही में प्रकाशित दो आत्मकथाओं में राज कपूर का जिक्र आया है। वैजयंतीमाला ने राज कपूर से अपने प्रेम को महज प्रचार बताया है। उधर देव आनंद लिखते हैं कि उनकी फिल्म ‘इश्क इश्क इश्क’ के प्रीमियर पर राज कपूर ने सरेआम जीनत को बधाई देते हुए चूमा।
कुछ दिन बाद एक पार्टी में उन्होंने जीनत को सीने से लगाया और देव आनंद का खयाल है कि जीनत भी उनसे शिद्दत से लिपटीं। देव आनंद को जीनत अमान से यह उम्मीद नहीं थी और उनका दिल टूट गया। यह अजीब-सा मजबूत दिल है, जो बार-बार टूटा है, परंतु आज भी धड़कता है।
दरअसल वैजयंतीमाला का राज कपूर से प्रेम को नकारना जितना बड़ा झूठ है, उतना ही असत्य है राज कपूर का जीनत अमान से प्यार होना।
राज कपूर के जीवन में केवल तीन ही प्रेम हुए हैं- नरगिस, वैजयंतीमाला और कृष्णा कपूर। सच्चई तो यह है कि जिस प्रेम के लिए राज कपूर जीवन भर भागते रहे, वह सच्चा प्यार उन्हें श्रीमती कृष्णा से ही था, जिसे उन्होंने उम्र के आखिरी पड़ाव पर समझा। अगर राज कपूर को जीनत से प्रेम होता, तो वे उसके शरीर का प्रदर्शन फिल्म ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ में नहीं करते।
उन्होंने किसी भी फिल्म में नरगिस का अश्लील प्रदर्शन नहीं किया और न ही वैजयंतीमाला को उस तरह से प्रदर्शित किया। राज क पूर इस मामले में निहायत ही पारंपरिक सामंतवादी थे। वे अपने प्रेम के केंद्र को सारी दुनिया के लिए अश्लील ढंग से कभी उजागर नहीं करते। जब राज कपूर ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ बना रहे थे, तब वे 54 वर्ष के थे और प्रेम से निवृत्त हो चुके थे।
दरअसल देव आनंद का जीवन और फिल्में महज उनके सुंदर पैदा होने के इत्तेफाक के इर्द-गिर्द घूमती रही हैं और उन्हें सबसे अधिक प्यार भी स्वयं से रहा है। अपनी ही छवि को मुग्ध होकर निहारते हुए झील में गिर जाने के कारण नारसियस की मृत्यु हुई और स्वयं से प्रेम करने को नारसिज्म कहा जाने लगा। सारे फिल्मकार और अधिकांश अन्य क्षेत्रों के सृजनशील लोग काफी हद तक आत्मकेंद्रित होते हैं और स्वयं से ही प्यार करते हैं।राज कपूर के जीवन का एकमात्र सच्चा प्यार फिल्म निर्देशन था और इसी प्रक्रिया का अंग रहा है नायिका से प्रेम करना। नायिकाएं भी फिल्मकार द्वारा प्रस्तुत अपनी मोहक छवि से प्रेम करते हुए छवि बनाने वाले से प्रेम के भ्रम तक पहुंचती रही हैं। बहरहाल देव आनंद ने आत्मकथा में हिम्मत तो दिखाई है और 100 प्रतिशत सच मनुष्य की सीमा के बाहर की बात है। बहरहाल इस किताब के गहन अध्ययन के बाद इस पर और लिखा जा सकता है।