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बाप-बेटे को मारकर महंत ने खुद को भी गोली मारी

गुहला चीका (कैथल) गांव अगौंध में एक डेरे के महंत ने बाप-बेटे को गोली से उड़ाकर खुद को भी गोली मार ली। दोहरे हत्याकांड के बाद आत्महत्या के इस मामले के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। मारे गए पिता व पुत्र का डेरे में अक्सर आना जाना था। सारे घटनाक्रम का एकमात्र चश्मदीद गवाह तीन साल का एक लड़का सोनू है, जो कि ढंग से बोल भी नहीं पाता है। इस मामले मे पुलिस को अब तक कोई सुराग हाथ नहीं लगा है।

गोलियों से थर्रा उठा डेरा :

गांव अगौन्ध की हद से थोड़ी दूर बना डेरा बाबा लालपुरी की इमारत बुधवार सुबह तकरीबन दस बजे गोलियों की आवाज से थर्रा उठी। डेरे से थोड़ी दूर अपने खेतों में काम कर रहा किसान जगतार सिंह भागा भागा डेरे की तरफ आया, लेकिन मुख्य दरवाजा बंद देखकर व अंदर से एक बच्चे की रोने की आवाजें सुनकर घबराकर गांव की ओर भाग लिया। जगतार सिंह ने अगौन्ध पहुंचकर गांव वालों को डेरे से गोलियों की आवाजें आने की बात बताई तथा गांव के पूर्व सरपंच मोहन सिंह थाना गुहला में फोन पर सूचना देकर खुद गांव वाले भारी संख्या में डेरे में आ पहुंचे।

फर्श पर पड़ी थी खून से लथपथ लाशें : जब तक पुलिस डेरे में पहुंची उससे पहले ही तीन साल का सोनू दरवाजा खोलकर बाहर आ गया था। ग्रामीणों ने बताया कि फर्श पर खून से लथपथ लाशें देखकर वे घबरा गए तथा पुलिस के आने तक कोई डेरे में नहीं घुसा।

गांव वालों ने बताया कि डेरे के दरबार हाल के बाहर सोहन लाल उर्फ सोमे की लाश पड़ी थी तथा उससे थोड़ा आगे मंदिर के द्वार के पास महंत बाबा शंकर पुरी का शव पड़ा था। शव से थोड़ी दूर बाबा की दुनाली बंदूक पड़ी हुई थी। दरबार हाल में सोमे के पिता ज्ञान सिंह का बैठी हुई हालत में शव पड़ा था, जिसका सिर घुटनों पर रखा हुआ था।

पुलिस अधिकारियों ने लिया मौके का जायजा एसपी कैथल अनिल राव, डीएसपी गुहला अभय सिंह व स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने घटना स्थल का जायजा लिया व लोगों से हत्याकांड के बारे में जानकारी ली। घटनास्थल पर शाम तक फिंगर प्रिंट्स एक्सपट्र्स भी पहुंच गए।

क्या कहती है पुलिस की थ्यूरी एसपी कैथल अनिल राव व डीएसपी गुहला अभय सिंह ने बताया कि हत्याकांड की सही तस्वीर तो जांच के बाद ही सामने आ पाएगी लेकिन फिलहाल यही लगता है कि महंत ने किसी ने किसी कारण से आवेश में आकर ज्ञान सिंह व उसके बेटे की हत्या करने के बाद खुद को गोली मार ली।

सदमे में है मासूम सोनू

अपने अपंग ताया के साथ हाथ रिक्शा की सवारी के लालच में डेरा लालपुरी आया तीन साल का मासूम सोनू भारी सदमे में है। गांव वालों व पुलिस के सवालों का वह कोई जवाब नहीं दे पाता। बस रोने लगता है। घटनास्थल पर दीवारों पर खून से रंगे छोटे छोटे हाथों के निशान व खून से लीपे हुए फर्श से इस बात का साफ अनुमान लगाया जा सकता है कि सोनू अपने ताया व दादा की हत्या होने के बाद उनके शवों से लिपटा होगा व बाद में रोते हुए उसने दीवारों से अपने हाथ रगड़े होंगे।





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