कोच्चि: ट्वंटी20 विश्वकप के फाइनल में एक अवसर ऐसा आया जब पूरे देश को एक बारगी लगा की कप गया हाथ से। मिसबाह उल हक ने जोगिंदर शर्मा की तीसरी गेंद पर एक स्कूप लगाया। गेंद हवा मंे थी और करोड़ों क्रिकेटप्रेमियों की जान सांसत में थी, लेकिन फाइन लेग में इस गेंद को लपकने वाले श्रीसंथ के दिमाग में कुछ नहीं था। उन्होंने कहा कि यह सबकुछ इतना अचानक हुआ कि उन्हें सोचने यह रिएक्ट करने का अवसर ही नहीं मिला। कैच लपकने के कुछ क्षण बाद ही उन्हें एहसास हुआ कि उनकी टीम विश्व चैंपियन बन गई है।
श्रीसंथ मुंबई में हुए ऐतिहासिक स्वागत समारोह के बाद गुरुवार को अपने गृहनगर कोच्चि पहुंचे। एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि ट्वंटी20 विश्वकप जीतना किसी सपने के सच होने जैसा ही था। श्री ने अपनी टीम की सफलता का श्रेय कभी हार न मानने के जज्बे और कठोर परिश्रम को दिया।
श्री ने कहा कि देश के लिए खेलना अपने आप में गौरव की बात है। विश्वकप की जीत उनके कैरियर का सबसे हसीन समय है।
नहीं तो दो मैच में बाहर होना पड़ता: मैदान में अपनी आक्रमकता के चलते अपने ही कप्तान के लिए परेशानी का सबब बनने वाले श्री ने कहा कि उन्होंने सेमीफाइनल वाला व्यवहार फाइनल मंे भी दर्शाया होता तो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बेंगलूरु और कोच्चि में होने वाले दो मैचों में उन्हें बाहर बैठना पड़ता। उल्लेखनीय है कि ट्वंटी20 विश्वकप के सेमीफाइनल में श्री ने हैडन को आउट करने के बाद जोरदार आक्रमकता का प्रदर्शन किया था। इसके चलते उन्हें चेतावनी मिली थी।
भाग्य भी हमारे साथ था: श्री ने कहा कि धोनी या फिर किसी अन्य के कप्तान होने से उन्हें अधिक फर्क नहीं पड़ता। जीत या फिर हार में भाग्य की भूमिका भी अहम होती है। वे जब भी टीम में होते हैं तो उनका काम देश के लिए खेलना होता है। उन्होंने टीम के तीन बड़े खिलाड़ियों की गैर माजूदगी में हुई जीत पर कहा कि वे सभी महाना खिलाड़ी हैं। उन्होंने सचिन को खेलते देखकर ही खेलना शुरु किया था।