नई दिल्ली: शराब किंग विजय माल्या ने फेरा उल्लंघन मामले में सुप्रीम कोर्ट की शरण लेकर प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उनके खिलाफ की जा रही जांच को खत्म करने की गुहार लगाई है। उनकी इस याचिका पर 8 अक्टुबर को सुनवाई होने की उम्मीद है।
इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में उनके खिलाफ ट्रायल कोर्ट के उस निर्णय को बरकरार रखा था जिसमें उनके खिलाफ एक सात साल पुराने मामले में आपराधिक जांच के आदेश दिए गए थे। माल्या पर आरोप है कि उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय के एक सम्मन की जान बूझकर अवमानना की थी।
निदेशालय ने जांच में पाया था कि माल्या ने अपने शराब ब्रांड के विदेशों में प्रचार के लिए फेरा के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए धन जुटाया था। यह अमला उनके और लंदन स्थित फर्म बेनेट्न फामरूला लिमिटेड के साथ दिसंबर 1995 में हुए करार पर पूछताछ के लिए माल्या को सम्मन दिया था।
शराब किंग पर आरोप था कि उन्होंने इस ब्रितानी कंपनी को 2 लाख डॉलर का भुगतान किया था, ताकि वह किंगफिशर का लोगो 1996 और 97 में कुछ यूरोपीय शहरों में आयोजित फामरूला वन रेस के दौरान दिखाया जा सके। यह सारा धन बिना रिजर्व बैंक की अनुमति के दिया गया था जो सरासर फेरा का उल्लंघन था।
अपनी याचिका में माल्या ने दलील दी है कि हाईकोर्ट में यह साबित नहीं हुआ है कि उन्हें सम्मन विदेशी मुद्रा कानून 1974 के तहत नहीं भेजा गया था। उन्हें चौंथा सम्मन स्पीडपोस्ट के जरिए भेजा गया था जो इस तरह के सम्मन तामील करने का उपयुक्त माध्यम नहीं है।