Manoranjan
Cinema
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सर्वश्रेष्ठ विदेशी फिल्म की श्रेणी में ‘एकलव्य द रॉयल गार्ड’ को इस बार ऑस्कर अवार्ड के लिए भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए भेजा जा रहा है । लेकिन इस फैसले ने बॉलीवुड को दो भागों में विभाजित सा कर दिया है। कई फिल्मकारों और फिल्म समीक्षकों का मानना है कि ऑस्कर के लिए इस बार फिल्म ‘धर्म’ या फिर ‘चक दे इंडिया’ को स्थान देना चाहिए था क्योंकि ये दोनों फिल्मों में ऐसा बहुत कुछ था जिसके दम पर ऑस्कर अवार्ड इस बार भारत आ सकता था । धर्म की निर्देशक भावना तलवार से हमने इस बार में बात की और जानने की कोशिश की कि आखिर वे इस पर क्या सोचती हैं-
0 ‘एकलव्य द रॉयल गार्ड’ के चयन को लेकर विरोध के स्वर सुनाई पड़ रहे हैं? क्या आपको लगता है कि आपकी फिल्म धर्म के साथ न्याय नहीं हुआ?
जी, बिल्कुल अन्याय हुआ है। और मेरा मानना है कि हमारॆ देश की तरफ से जो भी फिल्म जाए, वो बेहतर फिल्म हो और हमारॆ फिल्म जगत की बेहतर छवि को दुनिया में स्थान दिलाए। जहां तक मेरी फिल्म की बात है तो यह तो इसे दौड़ से बाहर करने के लिए लोगों ने लॉबिंग की है। इस कारण मेरी फिल्म अंतिम समय में दौड़ से बाहर कर दी गई है और मैं इसका पुरजोर विरोध करती हूं। मेरा साफ मानना है कि एकलव्य को ऑस्कर के लिए नहीं भेजा जाना चाहिए क्योंकि यह बहुत बेहतर दावेदार नहीं है।
0 जूरी के निर्णय के बाद तो अब यह तय हो गया है कि आपकी फिल्म को नहीं भेजा ज रहा। अब आगे की योजना क्या है क्या किसी और जरिए फिल्म को ऑस्कर में भेजने का मन बना रही हैं?
देखिए, फिलहाल मैं एकलव्य को भेजे जाने का विरोध कर रही हूॅ और उम्मीद है कि हमारी युवा जनरशन आगे आएगी और एक दोयम दर्जे की फिल्म को ऑस्कर के लिए भेजे जाने का विरोध करॆगी। मैं चाहती हूं कि एकलव्य को नहीं जाना चाहिए और इसके लिए हम सबको साथ मिलकर आवाज उठानी चाहिए।
0 तो आपका मानना है कि इस बार फिल्म के चयन में किसी प्रकार की राजनीति हुई है? ऐसा है, तो दोषी कौन है?
हां, राजनीति तो हुई है। कुछ लोगों ने जूरी मैंबर को प्रभावित करने के लिए लॉबिंग की है और इस कारण वे जो चाहते थे कि धर्म को ऑस्कर के लिए भारत की तरफ से भेजा जाए, वे भी इन लोगों के दबाव में आकर अपनी बात नहीं रख पाए हैं। मैं समझती हूं कि सुधीर मिश्रा, नदीम खान जैसे लोग नहीं चाहते थे कि फिल्म ऑस्कर में जाए और इन लोगों ने मेरी फिल्म के खिलाफ माहौल बनाने का काम किया।
0 आपके हिसाब से इस बार ऑस्कर पुरस्कार के लिए सबसे बेहतर दावेदार फिल्म कौन सी थी?
मेरा मानना है कि ‘गांधी मॉय फादर’, ‘चक दे इंडिया’ और ‘धर्म’ ये तीन ऐसी फिल्में थीं, जो बेहतर दावेदार थीं।
0 तो ‘एकलव्य द रॉयल गार्ड’ की अपेक्षा आपकी फिल्म ‘धर्म’ या फिर ‘चक दे इंडिया’ ज्यादा डिर्जविंग फिल्म थीं?
हां, दोनों ही में भावनात्मकता का समावेश है और वे हम भारतीयों के दिल को छूती हैं। फिल्म की कहानी बेहतर है जो फिल्म के स्तर को काफी उच्च शिखर तक ले जाती है जबकि एकलव्य में इसका अभाव है। एक बेहतर फिल्म में कहानी सबसे बड़ी चीज है। चक दे इंडिया भेजी जाती, तो मुझे जरा भी अफसोस नहीं होता।
0 एकलव्य को टैक्नोलॉजी के स्तर पर ज्यादा बेहतर बताया जा रहा है ?
अगर जूरी मानती है कि एकलव्य टैक्नोलॉजी में बेहतर है, तो वे उसे तकनीकी श्रेणी के तहत भेजें। अगर वास्तव में फिल्म में दम होगा तो वह हॉलीवुड की टैक्नोलॉजी से बेहतर प्रदर्शन कर पाएगी, लेकिन इस फिल्म को भारत की तरफ से सर्वश्रेष्ठ विदेशी फिल्म की श्रेणी में भेजना बिल्कुल गलत है। फिल्म के चरित्र लोगों से जुड़ाव स्थापित करने में नाकाम रहते हैं। फिल्म क्या कहना चाहती है? कुल मिलाकर यह फिल्म भारत का प्रतिनिधित्व करने का हक नहीं रखती है।
0 भारतीय कला फिल्में ऑस्कर में मार्केटिंग के स्तर पर कमजोर पड़ जाती है, क्या इसलिए भी इनको भेजने से भारतीय जूरी बचती है?
मै इस बात को नहीं मानती हूं। देखिए, मेरी फिल्म धर्म को कैंस फिल् म फैस्टीवल में आमंत्रित किया गया था और इसे वैनिस फिल्म फैस्टीवल में भी नामांकित किया गया था। मैक्सिको से भी आमंत्रण हमें मिला जबकि हमने अपनी फिल्म के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किए थे। एक बाद तय है कि अगर आपकी फिल्म में लोगों से जुड़ाव स्थापित करने वाली कहानी होगी तो वह पसंद की जाएगी। और मैं नहीं समझती कि हम मार्केटिंग लेवल पर कहीं कमजोर हैं।
0 वे कौन से कारण हैं जिनके कारण बॉलीवुड फिल्में ऑस्कर नहीं जीत पातीं?
सीधी सी बात है हम अपनी सबसे बेहतर फिल्म को ऑस्कर पुरस्कारों में नहीं भेज पाते। हमार यहां इतनी फिल्में बनती हैं, क्या हम वास्तव में सभी फिल्मों को पूरी तरह देखने के बाद ही किसी फिल्म का चयन करते हैं। जी नहीं, सच तो यह है कि ऐसा हो ही नहीं पाता। हमार यहां कितनी रीजनल फिल्में बनती हैं लेकिन उन तक हमारी जूरी पहुंच ही नहीं पाती। अगर हमें ऑस्कर जीतना है, तो हमें अपनी सभी फिल्में देखने के बाद ही सही फिल्म का चुनाव करके भेजना होगा ?
0 ‘चक दे इंडिया’ शाहरुख खान की फिल्म थी और ‘एकलव्य’ अमिताभ की, कहीं ऐसा तो नहीं कि इन दोनों की जंग में आपकी फिल्म ‘धर्म’ को परॆ कर दिया गया?
मैं नही समझती, ऐसा हुआ होगा। मैं तो बस यही जानती हूं कि ‘धर्म’ को जूरी ने विशिष्ट फिल्म माना था और इस साल ज्यूरी के अध्यक्ष रहें खुद विनोद पांडे ने भी टीवी चैनलों पर माना है कि ‘धर्म’ को ऑस्कर के लिए भेजना बेहतर निर्णय होता। मैं आपको बताना चाहती हूं कि अंतिम दो फिल्में ‘धर्म’ और एकलव्य थीं और 11 सदस्यीय ज्यूरी में से 6 सदस्यों ने एकलव्य के पक्ष में वोट दिए और 5 वोट धर्म को मिले । मै तो बस इतना जानती हूॅ एकलव्य को नहीं भेजा जाना चाहिए। भले ही हमारॆ देश से इस बार कोई फिल्म ऑस्कर के लिए न जा पाए।