bhaskar Web English
HomeVichaar Vichaar

सरकार चली राहुल की चाल

सम्पादकीय. केंद्र की यूपीए सरकार ने देश के सभी 612 जिलों में एक अप्रैल 2008 से महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का विस्तार करने का फैसला करके कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने की दिशा में पहला बड़ा कदम उठाया है।

हाल ही में कांग्रेस महासचिव नियुक्त किए गए राहुल ने पार्टी के दूसरे महासचिवों को साथ लेकर दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात कर देश के सभी ग्रामीण जिलों को रोजगार गारंटी योजना के दायरे में लाने की मांग की थी।

तब प्रधानमंत्री द्वारा इस बाबत शीघ्र फैसला लेने का भरोसा दिलाए जाने से साफ हो गया था कि सरकार युवराज की मांग पूरी करने में देर नहीं करेगी। और हुआ भी ऐसा ही। सरकार का यह फैसला राहुल गांधी को राष्ट्रीय राजनीति में प्रतिष्ठापितकरने का उपक्रम भी माना जा सकता है।

अब कांग्रेसजन डंके की चोट पर देशभर में यह दावा करते घूम सकते हैं कि उनके युवराज की बदौलत रोजगार गारंटी योजना तीन साल पहले ही देशभर में लागू हो रही है अन्यथा 2011 में ही पूरा देश इसके दायरे में आ पाता।

यहां काबिलेगौर है कि बाजारवादी नीतियों के हिमायती केंद्रीय वित्तमंत्री पी चिदंबरम अपने बजट में लोक कल्याण की योजनाओं को लिए आवंटन करने में बेहद कंजूसी बरतते आए हैं, पर उन्होंने भी इस योजना के लिए अतिरिक्त आठ हजार करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध कराने में कोई हीला-हवाला नहीं किया।

बहरहाल, रोजगार गारंटी योजना के विस्तार का निर्णय लेने के साथ ही सरकार को इस योजना के अब तक क्रियान्वयन की गहन समीक्षा और इसकी खामियों के निराकरण के पुख्ता उपाय भी करने चाहिए थे।

अभी जिन 330 जिलों में यह योजना लागू है, उनसे आए-दिन शिकायतें आती रहती हैं। कहीं अपात्र लोगों के रोजगार कार्ड बना दिए गए हैं, कहीं ये कार्ड बनाने में भाई-भतीजावाद का बोलबाला है, तो कहीं जातिवाद का और कहीं हाजिरी रजिस्टरों में धांधली की जा रही है, तो कहीं निर्धारित राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है।

ऐसी भी शिकायतें आम हैं कि इस योजना के तहत जो काम कराए जा रहे हैं, वे स्थायी स्वरूप के और लोकोपयोगी नहीं हैं। इन शिकायतों के चलते कुछ लोगों ने तो इस योजना को भ्रष्टाचार गारंटी योजना तक का नाम दे रखा है।

याद रहे कि राहुल के पिता राजीव गांधी ने ही शिद्दत और संजीदगी के साथ यह मुद्दा उठाया था कि तमाम योजनाओं के लिए आवंटित राशि का बहुत थोड़ा सा हिस्सा उन लोगों तक पहुंच पाता है जिनके लिए वे योजनाएं बनाई जाती हैं। रोजगार गारंटी योजना के विस्तार के साथ इस पर ठीक से अमल का सौ-फीसदी फूल-प्रूफ तंत्र और प्रक्रिया बनाना राहुल और उनकी टीम की महती जिम्मेदारी है।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: