अच्छी सेहत का संतुलित भोजन से सीधा संबंध है। भोजन में आयोडीन की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। हमें प्रतिदिन एक सुई की नोंक के बराबर आयोडीन की
जरूरत होती है, यानी जिंदगी भर एक चम्मच आयोडीन। दरअसल यह एक ऐसा तत्व है जो व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक विकास पर सीधा असर डालता है। आयोडीन का सबसे सुलभ स्रोत है नमक। एक चुटकी नमक में सेहत का खजाना छिपा होता है।
क्या है आयोडीन
आयोडीन एक सूक्ष्म पोषक तत्व है, जो थायराइड ग्रंथि के सभी कार्यो के लिए बहुत जरूरी है। यह थायराइड ग्रंथि शारीरिक व मानसिक बढ़ोतरी करती है। प्रोटीन बनाने के साथ ही यह शरीर की पाचन क्रिया को ठीक रखती है।
कितना जरूरी है आयोडीन
भोपाल की डायटीशियन अमिता सिंह के अनुसार आमतौर पर एक व्यक्ति को प्रतिदिन 150 माइक्रोग्राम आयोडीन की जरूरत होती है, जबकि आमतौर पर भारत के अधिकतर इलाकों के पानी में 01-20 माइक्रोग्राम प्रति लीटर आयोडीन होती है। आयोडीन समुद्रीय तट पर उगने वाले खाद्य पदार्थो में एवं वहां के पानी में 2-15 माइक्रोग्राम होती है।
आयोडीन की कमी और सेहत
आयोडीन की कमी शारीरिक और मानसिक दोनों स्तर पर सेहत को प्रभावित करती है। गर्भवती महिला को आयोडीन न मिले तो उसके गर्भ में पल रहे शिशु का शारीरिक व मानसिक विकास अवरुद्ध हो सकता है। अर्थात शिशु विकलांग भी पैदा हो सकता है। आयोडीन की कमी के चलते गर्भपात की आशंका भी रहती है। बच्चों एवं किशोरों में आयोडीन की कमी उन्हें मानसिक व शारीरिक रूप से कमजोर बना देती है। बच्चों का मस्तिष्क पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाता, जिसके कारण वे पढ़ाई-लिखाई में भी पिछड़ने लगते हैं। आयोडीन की कमी गलघोंटू की कारक भी बन सकती है। इसमें थायराइड ग्रंथि में सूजन आ जाती है और वह गले के बाहर दिखाई देने लगती है।
आयोडीन की कमी और लक्षण
शरीर में आयोडीन की कमी होने पर कुछ लक्षण दिखाई देने लगते हैं। जैसे त्वचा रूखी हो जाती है और आवाज में भी बदलाव आने लगता है। व्यक्ति को थकावट बहुत अधिक लगती है।
कैसे पूरी हो आयोडीन की जरूरत
नमक आयोडीन का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका सर्वसुलभ होना है। नमक का प्रयोग हर व्यक्ति अपनी रोजाना की डाइट में करता है। इसलिए आयोडीनयुक्त नमक उपयोग में लाकर आप इसकी कमी से होने वाली परेशानियों से बच सकते हैं। इसके अलावा नमक समुद्री इलाकों में पाए जाने वाले खाद्य पदार्थो में भी पाया जाता है।