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पूर्णिमा बनीं मप्र आइडल

ग्वालियर.idle उद्भव सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान के तत्वावधान में आयोजित उद्भव सुर-ताल प्रतियोगिता का फाइनल राउंड एवं समापन समारोह शुक्रवार को डा. भगवत सहाय सभागार में आयोजित किया गया। प्रतियोगिता में गायकों की पेशकश और जद्दोजहद को देखकर ऐसा लगा, जैसे यह एमपी आइडल नहीं इंडियन आइडल का मुकाबला हो। इस सुरों से महकती हुई शाम के निर्णायक और मुख्य अतिथि थे मशहूर गजलकार चंदन दास।

सुरों का यह मुकाबला शुरू हुआ ग्रुप ए से, जहां उम्र में कुछ कम, मगर प्रतिभा में बेजोड़ सुर साधकों के बीच प्रतिस्पर्धा थी। इस ग्रुप में सबसे पहले ईवा मदान ने ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’ की प्रस्तुति दी, श्रोताओं के हृदय तक अपनी आवाज पहुंचाने में लियण्ड्रा जार्ज कामयाब रही।

लड़कपन की उम्र में उसके द्वारा गाया गया दस्तक फिल्म का गीत ‘बंइयां ना धरो ओ बलमा’ किसी अनुभवी गायक सी गंभीरता और सुर संतुलन लिए हुआ था। ग्रुप बी में पी. भावनी की प्रस्तुति सुन श्रोताओं को पहले ही अंदाजा हो चला था कि इस वर्ग की विजेता वही बनेगी।

उसने वक्त फिल्म का ‘आगे भी जाने न तू, पीछे भी जाने न तू’ गाकर न केवल श्रोताओं को बल्कि निर्णायक श्री दास को भी प्रभावित किया। उसकी गायकी का अंदाज, चेहरे पर आत्मविश्वास और गीत के साथ मित्रता का भाव, वहां मौजूद हर श्रोता को प्रशंसा करने पर मजबूर कर रहा था।

ग्रुप सी में प्रतिभागियों के बीच मुकाबला कुछ कड़ा दिखा। इस वर्ग में चाहे साजन शर्मा की प्रस्तुति हो, पारुल बांदिल की या फिर पूर्णिमा सोलंकी की पेशकश, काबिले तारीफ थी। इन प्रतिभागियों की प्रस्तुति देखकर श्रोता भी समझ नहीं पा रहे थे कि किसके गायन को दाद दी जाए। इसी तरह चौथे स्थान पर पीयूष गोरे द्वारा गूंज उठी शहनाई फिल्म का गाया गीत ‘कह दो कोई न करे यहां प्यार’ श्रोताओं के दिल में घर करता रहा।

इस स्वर संध्या की अध्यक्षता उद्भव सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान के मुख्य संरक्षक बालेंदु शुक्ल ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में स्टेट बैंक आफ इंडिया के उप महाप्रबंधक जेसी भूटानी मौजूद थे। अन्य मंचासीन अतिथियों में अमूल्य सामवेदी जोनल हेड एयरटेल मोबाइल, डीडी मालपानी दीनदयाल सिटी मॉल, सत्यशील दीक्षित वाइस चेयरमैन ग्वालियर इंजीनियरिंग कालेज, भरत झंवर चेयरमैन सिटी कालेज, अशोक कपूर, सुबोध बोथरा एमपीसीटी कालेज के चेयरमैन रामसिंह धाकरे आदि उपस्थित थे।

इससे पूर्व कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर अतिथियों का स्वागत संस्था के सचिव दीपक तोमर, आयोजन सचिव भरत शर्मा, रवि सक्सेना, कोमल कल्याण जैन आदि ने किया। कार्यक्रम का संचालन डा. ममता शर्मा एवं भरत शर्मा ने किया। अंत में आभार प्रदर्शन संस्था के अध्यक्ष डा. केशव पांडे ने किया।

एक बार नहीं कई बार सुरों की आजमाइश
इस सुर और ताल की महफिल में शामिल हुए प्रतिभागियों की आवाज को परखने के लिए श्री दास ने एक बार नहीं, दो बार नही,ं बल्कि तीन-तीन बार उन्हें मंच पर बुलाया। उनके सुरों का उतार-चढ़ाव देखा और किसी जौहरी की तरह हर तरह से इनके आवाज को जांचा-परखा। ग्रुप सी की प्रतिभागी पूर्णिमा सोलंकी को उन्होंने तीन बार मंच पर बुलाया और ठहरे हुए लय में गाने के लिए कहा। इसी तरह पीयूष गोरे और लियण्ड्रा जार्ज के गायकी की आजमाइश भी हुई।

हिन्दुस्तान का नाम रोशन करें
चंदन दास ने ग्वालियर के श्रोताओं से रूबरू होते हुए कहा कि यहां आने का अवसर पाकर काफी खुशी हुई। इस प्रतियोगिता में कुछ प्रतिभागियों को सफलता भले ही न मिले, कई बार समय अच्छा नहीं होता और सही सुर नहीं मिल पाते, पर निराश होने की बात नहीं है। एक बार फिर से मेहनत करनी चाहिए। यह कलाकार अपनी गायकी से आगे बढ़ें तथा हिन्दुस्तान का नाम रोशन करें।

कलाकारों के लिए तीन घोषणाएं
इस मधुर संध्या में विजयी रहे प्रतिभागियों के लिए एमपीसीटी कालेज के चेयरमैन रामसिंह धाकरे ने तीन घोषणाएं कीं, जो किसी उपहार की तरह थीं। पहली घोषणा कलाकारों के लिए 21 हजार राशि की सहायता थी।

दूसरी घोषणा के रूप में उन्होंने टेक्निकल लाइन में इंट्रेस्ट रखने वाले छात्रों को अपने कालेज में प्रवेश देने की तथा अध्ययन की व्यवस्था करने की बात कही। आखिरी घोषणा के दौरान उन्होंने भविष्य में कालेज के आडिटोरियम में उद्भव द्वारा कार्यक्रम आयोजित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की।

‘न जीभरकर देखा न कुछ बात की..’
इस सुरों से सजी-धजी संध्या में गजल गायक चंदन दास ने कई गजलों को अपनी आवाज देकर गजल के मुरीदों को अपनी आवाज और अंदाज का दीवाना बनाया। उनके गजलों में खोने के लिए स्वयं श्रोता भी बेचैन दिखाई दे रहे थे।

श्री दास ने बशीर ब्रद की मशहूर गजल ‘न जीभरकर देखा न कुछ बात की, बड़ी आरजू थी मुलाकात की’ सुनाकर गजल को शौकीनों को एक अलग दुनिया में ले गए। उनकी आवाज में सजी यह गजल श्रोताओं के कानों से होते हुए दिल पर दस्तक देने पहुंची ओर वह वाह-वाह कर उठे। उनकी दूसरी पेशकश थी- ‘पिया नहीं जब गांव में आग लगे सब गांव में’।

निदा फाजली का यह कलाम उनकी आवाज में सजकर कुछ और दिलकश हो उठा। उनके साथ तबले पर संगत की अब्दुल हमीद ने। सारंगी पर अब्दुल मजीद, हारमोनियम पर अब्दुल सलीम खान, गिटार पर शिवकुमार, की-बोर्ड पर हर्ष शर्मा तथा परकुशन पर निर्मल जाधवानी ने साथ दिया। गजल की इस महफिल में श्रोता किसी प्यासे की तरह उनकी गायकी से अपनी प्यास बुझाते रहे और आखिर तक प्यासे ही दिखे।





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