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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. शुक्रवार को सुबह से शाम तक 60 बड़ी झांकियों के अलावा सौ से ज्यादा मंझोली और छोटी प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। रातभर जागने के बावजूद लोगों का जोश कम नहीं हुआ और श्रद्धालुओं का रेला ब्रम्हमुहूर्त में ही खारुन तट पर पहुंच गया।
इसके बाद से शाम तक नदी के तट पर हजारों लोग इकट्ठा रहे। गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ..के घोष के साथ दिनभर प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ।
ऊंची और भव्य प्रतिमाओं को क्रेन के सहारे विसर्जित किया गया। यह देखकर लोग रोमांचित होते रहे। कई श्रद्धालुओं ने छोटी प्रतिमाओं को विसर्जित करने के लिए तट पर तैनात की गई नौकाओं का भी मजा लिया।
इसके पहले, विसर्जन यात्रा गुरूवार की रात आठ बजे शारदा चौक से शुरू हुई थी। इस साल भी आसपास के ग्रामीणों की खासी भीड़ रही। सड़कें खचाखच रहीं। भीड़ इतनी थी कि झांकियों को आगे बढ़ने में समय लगा।
गुरुनानक चौक, एमजी रोड होकर शारदा चौक पहुंचने के बाद झांकियों को जयस्तंभ चौक से निकलने में सुबह हो गई। वहां पैर रखने की जगह नहीं थी। झांकियों के बीच डीजे और बैंडबाजों की धुन पर युवक मस्ती में थिरकते रहे।
आतिशबाजी ने भी भक्तजनों का उत्साह बढ़ाया। उड़ते गुलाल ने माहौल में नया रंग भर दिया था। झांकियां सदर होते हुए कंकालीपारा, पुरानीबस्ती, लाखेनगर, अश्वनीनगर, रायपुरा पहुंची और यहां से खारुन तट के लिए रवाना हुई।
जगह-जगह स्वागत
यात्रा मार्ग पर जगह-जगह स्वागत पंडाल लगाए गए थे। शहर विधायक व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल समेत कई नेताओं तथा संगठनों के पंडाल रास्तेभर लगे रहे तथा स्वागत-सत्कार चलता रहा। पंडालों में मौजूद लोगों ने प्रतिमाओं और झांकियों पर फूल बरसाए। यात्रा रूट पर कई जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। नगर निगम ने विसर्जन स्थल पर पंडाल सजा रखा था।
1000 जवान तैनात
सुरक्षा के लिहाज से पुलिस प्रशासन ने 1000 जवानों को तैनात किया था। हर झांकी के साथ एक थानेदार की ड़यूटी थी। प्रमुख चौक-चौराहे समेत एक दर्जनभर से ज्यादा स्थानों पर बने निगरानी टावरों से तैनात पुलिसकर्मी विसर्जन जुलूस पर नजर रखे हुए थे। जुलूस के दौरान सामाजिक संगठनों ने जगह-जगह पेयजल आदि के प्रबंध भी किए थे।
आयोजन सफल
विसर्जन स्थल पर शाम को आयोजित समापन समारोह में सभापति रतन डागा ने कहा कि चार दिनों तक बिना बाधा के 4 हजार से ज्यादा गणोश प्रतिमाओं का विसर्जन खारुन तट पर हुआ। इस दौरान लाखों की भीड़ उमड़ी, लेकिन बिना किसी बाधा के आयोजन पूरा हो गया।