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Chhattisgarh
Raipur Raipur दुर्ग.
मोहलाई स्थित श्री कृष्ण गोशाला एवं जीव रक्षा केंद्र ने बैलजोड़ी से काम करने वाला सिंचाई पंप कामधेनु तैयार किया है। पंप चलाने के लिए पेट्रोल या डीजल की जरूरत नहीं होती। एक बैलजोड़ी की मदद से किसान को हर घंटे 30 हजार लीटर तक पानी मिल जाता है।
गोशाला के अध्यक्ष भीखमचंद जैन व महासचिव अचलदास पारख के मुताबिक पंप की क्षमता पांच एचपी मोटर के बराबर है। श्री पारख ने बताया कि बैलचलित पंप कामधेनु के निर्माण में 20 से 25 हजार रुपए का खर्च आता है। ज्यादातर सामान मोटर पंप से संबंधित कलपुर्जे ही हैं।
बैलचलित पंप को गुजरात, महाराष्ट्र व राजस्थान के किसान भी देखकर जा चुके हैं। गोशाला के सीईओ संजय बोहरा का कहना है कि बैलचलित पंप 30 से 35 फुट गहरे कुएं से पानी खींच सकता है। उन्होंने बताया कि इसमें कबाड़ से लाया गया काफी सारा सामान इस्तेमाल किया गया है।
बुधवार को राज्य योजना आयोग के सचिव डा. एचएल प्रजापति भी पंप देखकर गए। पंप चलवाकर देखने वाले प्रजापति ने भी माना कि बिजलीविहीन दूरदराज के गांव ही नहीं बल्कि खेती-बाड़ी करने वाले सामान्य किसानों के लिए भी यह बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।
कैसे काम करता है पंप :
मोटे तौर पर यह मोटर पंप पारंपरिक तेल निकालने की बैल घानी व आधुनिक तकनीक का मिश्रण है। लकड़ी की बल्ली को एक बड़े गियर से जोड़ा गया है। इसके सामने चार छोटे गियर लगाए गए हैं। चारों गियर को राड के माध्यम से एक चक्के से जोड़ा गया है। चक्के का बोल्ट डिफेंसियल से जुड़ा है।
बल्ली में बैल या भैंस की जोड़ी को जोतने पर गियर घूमता है। बड़ा गियर जितने समय में एक बार घूमता है, उतने ही समय में चारों छोटे गियर व डिफेंसियल 16 बार घूम जाते है। डिफेंसियल से एक पाइप कुएं में डाला गया है। डिफेंसियल के घूमने से तीन इंच मोटी पानी की धार बाहर निकलती है।
मानवचलित पंप भी
एक मानवचलित पंप को भी इसी से जोड़ा गया है। इसे साइकिल की पुरानी रिंम, गियर व चेन से बनाया गया है। एक टू सीसी कंप्रेसर से एंप्रेलर को जोड़कर हाफ इंच के एयर पाइप को कुएं में डाला गया है। साइकिल के पैडल को चलाने पर एयर पाइप में हवा के दबाव से कुएं का पानी बाहर आता है। गोशाला प्रबंधन के मुताबिक यह 3 से 4 सौ फुट नीचे का पानी खींच सकता है। इससे डेढ़ इंच मोटी धार निकलती है।