जयपुर. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने सत्ता व संगठन से जुड़े लोगों को नसीहतें देते हुए कहा है कि उन्हें हमेशा मर्यादाओं का पालन करना चाहिए और
छीना-झपटी से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि धन संग्रह तो रावण ने भी बहुत किया था, लेकिन लोग मर्यादा पुरुषोत्तम राम को याद करते हैं, सोने की लंका में रहने वाले उस रावण को नहीं, जो राम से कहीं अधिक धनवान, बलवान और ज्ञानवान था।
भाजयुमो के राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्हें ऐसे लोगों की बुद्धि पर तरस आता है, जो शासन में रहते हुए भी छीना-झपटी में लगे रहते हैं। जो लोग साफ नीयत से संगठन के लिए पसीना बहाएंगे और मर्यादाओं में रहेंगे, भविष्य उनका ही है। किसी भी सूरत में संयम व शालीनता नहीं खोनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मर्यादा में रहने और कम बोलने वाले लोग कमजोर नहीं होते। जो भी बोलें, अंतरात्मा में झांककर ही बोलें। उन्होंने कहा कि शक्ति-प्रदर्शन भी जरूरी है, लेकिन हमारी बातचीत में स्वाध्याय भी प्रमुखता से झलकना चाहिए।
सरकार पर नहीं की कोई टिप्पणी
मुख्यमंत्री राजे ने अपने भाषण में ज्यादातर समय अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाने में लगाया, लेकिन राजनाथसिंह ने अपने भाषण में सरकार के कामकाज पर कोई टिप्पणी नहीं की। बाद में जब उनसे पूछा गया तो उनका कहना था कि चार साल से राजस्थान में ठीक काम
हो रहा है।
असंतुष्ट धड़े के लोग भी आए
असंतुष्ट धड़े के प्रमुख नेता ललितकिशोर चतुर्वेदी और गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया भी कार्यक्रम में दिखाई दिए। कटारिया तो कार्यक्रम शुरू होने से काफी पहले पहुंच चुके थे। असंतुष्ट खेमे से जुड़े कई पदाधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
माई के लाल फिर उभरे
राजनाथ ने कहा कि पार्टी के नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने छह साल तक देश में शासक के रूप में नहीं, बल्कि सेवक के रूप में हुकूमत की थी। वाजपेयी एक ऐसे माई के लाल थे, जिन्होंने कभी भ्रष्टाचार को संरक्षण नहीं दिया।
क्यों दी मर्यादा की नसीहतें
राजनाथ ने कहा कि कांग्रेस व वामदलों का कई बार विभाजन हो चुका, लेकिन भाजपा अकेली ऐसी पार्टी है, जो आज तक अखंड रही है। इसलिए उन्होंने पार्टी की एकता पर जोर देने के लिए कहा कि मतभेद भले रहें, लेकिन मनभेद बाहर नहीं आएं।
क्या ये राजस्थान को लेकर कहा?
जब उनसे पूछा गया कि क्या यह बात उन्होंेने राजस्थान के संदर्भ में कही तो उनसे पहले मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे बोल पड़ीं कि यहां तो पूरे देश के प्रतिनिधि थे। इस पर राजनाथसिंह ने कहा कि उन्होंने सबके लिए ही यह बात कही है।