इंदौर. सालभर से बेटे की कैद में मौत से बदतर जीवन जी रही 70 वर्षीय मां आजाद हुई तो जिंदगी साथ छोड़ गई। डॉक्टर ने बताया कई दिन भूखी-प्यासी रहने के कारण शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो गई थी। पड़ोसियों से मां की बदहाली जान नाईजीरिया से आई बेटी ने भाई-भाभी पर मां की हत्या का आरोप लगाया।
मिशन अस्पताल में 35 साल डायरेक्टर ऑफ नर्सेस रहीं तारा विलियम्स ने वहीं अंतिम सांस ली। वे संगीत अपार्टमेंट, पद्मावती कॉलोनी में बेटे सुभाष और बहू सुरुचि के साथ रहती थीं। बेटी डॉ.विजयलक्ष्मी सिंह ने बताया वह घर उन्होंने 2000 में रिटायरमेंट के बाद लिया था। जुलाई 2006 में मैं भारत आई थी तब मां बहुत डरी हुई थी।
तब भाई से पूछताछ की तो उसने कहा था हमारे घर के मामले में मत बोलो। कुछ दिन पहले पड़ोसियों ने फोन कर बताया वे घर में कैद हैं और दिनभर खाना-पानी भी नहीं दिया जाता। तब 14 सितंबर को नाईजीरिया से इंदौर आई। पहले तो भाई ने उनसे मिलने ही नहीं दिया।
रिश्तेदारों के साथ पहुंची तो झगड़ा किया लेकिन मैं उन्हें निकाल ही लाई। जिस कमरे में उन्हें रखा था वहां न रोशनी थी, न पीने का पानी। उन्हें रॉबर्ट्स नर्सिग होम में भर्ती कराया। इलाज कर रहे डॉ. पी.जी. रमन ने बताया वे हाइपर टेंशन और डायबिटीज से पीड़ित थीं। भूखे-प्यासे रहने के कारण शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो गई थी। 25 सितंबर को हालत बिगड़ी तो मिशन अस्पताल में भर्ती कराया जहां 28 सितंबर को मौत हो गई।
हंसते हुए पहुंचे बेटा-बहू
मिशन अस्पताल में ‘भास्कर’ संवाददाता इस मामले की छानबीन कर रही थी तभी सुभाष और सुरुचि हंसते हुए परिसर में घुसे। हालांकि कमरे के भीतर जाते ही मां के शव से लिपटकर रोने लगे। मीडिया ने बात करना चाही तो गाली-गलौज करने लगे। बहन द्वारा लगाए हत्या के आरोप पर बोले वे हमारे साथ थीं तब तक ठीक थीं। बहन अस्पताल लाई उसके बाद ही मौत हुई।