इंदौर.
व्यस्ततम जेलरोड पर न्यू नॉवेल्टी मार्केट में गुरुवार रात लगी भीषण आग का असर दूसरे दिन भी रहा। शुक्रवार सुबह जली दुकानों के मालिक मलबे में अच्छे और बचे सामान की तलाश में जुटे रहे। इसके चलते मार्केट बंद रखा गया। आग का कारण अवैध निर्माण और गलत तरीके से बिजली कनेक्शन लेना माना जा रहा है।
न्यू नॉवेल्टी मार्केट की 35 में से 10 दुकानों में काफी नुकसान हुआ। गुरुवार रात नौ बजे बाद लगी आग दो बजे के आसपास बुझा दी गई थी लेकिन उसके बाद भी किसी को अंदर नहीं जाने दिया। पास की बिल्डिंग में रहने वालों को जरूर नीचे उतारकर रिश्तेदारों के यहां भेजा। व्यापारी सुबह जल्दी मार्केट पहुंच गए थे लेकिन चढ़ाव बंद होने के कारण उन्हें नॉवेल्टी मार्केट से होकर अपनी दुकानों तक जाना पड़ा।
अवैध निर्माण व गलत बिजली कनेक्शन
मार्केट बलदेव व किशन हिंदुजा का है। उन्हें तलमंजिल पर दो मंजिल (जी+2) निर्माण की ही अनुमति है लेकिन तीसरी मंजिल पर भी दुकानें बनी हैं। बिजली कनेक्शन नहीं होने की बात भी सामने आ रही है।
व्यापारी दबी जुबान से स्वीकारते हैं कि नीचे से तार खींचकर लाइट का इंतजाम किया है। बलदेव हिंदुजा का कहना है हमने अवैध निर्माण नहीं किया। निगम ने तीसरी मंजिल पर अस्थायी निर्माण की अनुमति दी थी। तार खींचकर कनेक्शन लेने की बात भी गलत है।
व्यापारियों की बैठक कल
न्यू नॉवेल्टी मार्केट के व्यापारियों की बैठक रविवार को होगी। समिति के अध्यक्ष राजू सलूजा ने बताया उसमें नुकसान व मार्केट से संबंधित समस्याओं पर बातचीत की जाएगी। बैठक तो शुक्रवार को भी हुई लेकिन जिनका नुकसान हुआ वे व्यापारी शामिल नहीं हो पाए।
..तो क्या होता?
फायर ब्रिगेड समय रहते आग पर काबू नहीं पाती तो क्या होता? यह सवाल दिनभर उठता रहा। एक जवाब था आसपास के भवन भी आग की चपेट में आ जाते और पीछे लोधी मोहल्ला व काछी मोहल्ला घनी बस्ती है।
अव्यवस्था बड़ी, संसाधन बौने
अमित मंडलोई.
एक महीने में ही लसूड़िया व न्यू नॉवेल्टी मार्केट में लगी आग ने शहर की अग्नि सुरक्षा की हकीकत उजागर कर दी है। अव्यवस्थाओं के आगे संसाधन बौने साबित हुए और लाखों की संपत्ति देखते ही देखते खाक हो गई। उठते धुएं के गुबार में ‘भास्कर’ ने खोजबीन की तो कई सुलगते सवाल नजर आए।
शहर में 10 प्रतिशत बड़े भवन ही ऐसे हैं, जिनके लिए फायर ब्रिगेड से अनुमति मांगी गई है। शहर के कई हिस्से ऐसे हैं, जहां फायर ब्रिगेड पहुंचना मुश्किल है। सांवेर रोड औद्योगिक क्षेत्र व मांगलिया जैसे इलाके में भी फायर ब्रिगेड पहुंचने में आधा घंटा तक लगता है। वर्षो से पटाखा व्यवसाय शहर के बीच धड़ल्ले से चल रहा है। सरकार की गंभीरता का अंदाजा इससे ही लगता है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा अनुमोदित फायर फायटिंग बिल भी छह साल से विधानसभा तक नहीं पहुंचा।
आधा घंटा इंतजार
शहर के बड़े हिस्से में फायर ब्रिगेड पहुंचने में आधा घंटा लगता है। शहर के तेजी से विस्तार के बाद भी फायर सब स्टेशन चार ही हैं जबकि नियमानुसार 50 हजार की आबादी पर एक होना चाहिए। फायर ब्रिगेड लंबे समय से छावनी, मांगलिया, राजेंद्रनगर और सांवेर रोड औद्योगिक क्षेत्र में सब स्टेशन के लिए जमीन की मांग रहा है।
छह साल से अटका है एक्ट
प्रदेश का फायर फायटिंग बिल 6 साल से विधानसभा का मुंह नहीं देख पाया। पुलिस मुख्यालय ने 2001 में इसका मसौदा सरकार को सौंपा था।
कम से कम 20 फीट का रोड
फायर ब्रिगेड की बड़ी गाड़ियां आठ-नौ फीट चौड़ी हैं। साथ में पानी के टैंकर भी लगते हैं। बचाव दल भी साथ-साथ काम करता है इसलिए रोड कम से कम 20 फीट चौड़ा होना चाहिए लेकिन शहर के कई बाजार 8-10 फीट के होकर रह गए हैं।
40 फायर फाइटर
फायर ब्रिगेड के पास 40 फायर फाइटर हैं जिनमें वाटर टेंडर, फोम टेंडर, वाटर वाउजर व मल्टीपरपज फायर फाइटर शामिल हैं। मल्टीपरपज फाइटर से फोम, कार्बन डाई ऑक्साइड, ड्राय केमिकल पावडर व पानी फेंका जाता है। फायर फाइटर प्रति मिनट 1800 लीटर पानी फेंक सकते हैं। हाईड्रोलिक प्लेटफार्म सिस्टम खराब पड़ा है। नगर निगम के पास चार गाड़ियां हैं, वे भी काफी पुरानी।
होलकरों के समय थे हाईड्रेंट
होलकर रियासत के समय शहर में जगह-जगह हाईड्रेंट लगे थे। देश के कुछ बड़े शहरों और विदेशों में ऐसे हाईड्रेंट से पाइप जोड़कर पानी लेने का इंतजाम है लेकिन शहर में यह व्यवस्था दम तोड़ चुकी है।
ये राह नहीं आसान
शहर में कई ऐसे सघन इलाके हैं जहां आगजनी हो तो राहत पहुंचाना भी आसान नहीं। राजबाड़ा व आसपास बसे आड़ा बाजार, इमली बाजार, कपड़ा मार्केट, बरतन बाजार, शक्कर गली, सराफा, जूना पीठा में सड़कें इतनी संकरी हैं कि फायर ब्रिगेड पहुंचना मुश्किल है। रिवर साइड रोड, रानीपुरा, जवाहर मार्ग के दोनों और की दर्जनों गलियां, जेल रोड, खातीपुरा, कोठारी मार्केट, काछी मोहल्ले में भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति है।
सरवटे, रेलवे स्टेशन, लोहा मंडी और आसपास का पूरा क्षेत्र, एमजी रोड पर बड़ा गणपति से रिगल चौराहा तक, छावनी, सुभाष मार्ग, राजमोहल्ला का बड़ा हिस्सा व जीएनटी मार्केट भी काफी संकरा और घना है। जूनी इंदौर के कटकटपुरा, रावजी बाजार में भी फायर ब्रिगेड पहुंचाना टेढ़ी खीर है।
पटाखे वालों को अनुमति नहीं
रानीपुरा व नौलखा जैसे सघन क्षेत्र में पटाखों का कारोबार होता है। राऊ में तो पटाखे बनाए जाते हैं। नियमानुसार इसके लिए अग्निशमन विभाग की अनुमति लेना चाहिए लेकिन शहर में वर्षो से नहीं ली गई।
10 प्रतिशत भवनों में ही अनुमति
12.5 मी. से ऊंचे भवन निर्माण के लिए अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना जरूरी है। अफसर बताते हैं शहर में 10 प्रतिशत भवनों के लिए ही ऐसी अनुमति ली गई है। उद्योगों के हाल और बुरे हैं।
ये जरूरी है
बड़े भवनों में कम से कम एक लाख ली. क्षमता के दो वाटर टैंक (ओवरहेड व अंडर ग्राउंड)।
निश्चित स्थानों पर हाईड्रेंट जो पम्प के जरिये वाटर टैंक से जुड़े हों।
60x60 फीट की फ्लोर पर 20 फायर एक्सटिंग्यूशर हो।
अज्वलनशील पदार्थ से बनी चौड़ी सीढ़ियां जिनका निकास सीधे बाहर की ओर हो।
स्प्रिंकलर सिस्टम, फायर अलार्म और स्मोक डिटेक्टर।
>> विभाग के पास संसाधन कम नहीं हैं। शहर के क्षेत्रफल में बढ़ोतरी को देखते हुए कुछ सब स्टेशन और होना चाहिए। फायर एक्ट लागू होने पर कई समस्याएं खुद ब खुद खत्म हो जाएंगी।
- बी.एल. गंधर्व, एसपी फायर ब्रिगेड
>> निगम के पास फायर के लिए कम से कम आठ गाड़ियां होना चाहिए। हाईड्रोलिक प्लेटफॉर्म भी जरूरी है।
- प्रकाश उपाध्याय, फायर ऑफिसर नगर निगम