नई दिल्ली. मध्यावधि चुनाव की आहट के बीच सरकार ने शुक्रवार को महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एनआरईजी) को अगले साल से पूरे देश में लागू करने का फैसला किया है। अब तक यह योजना देश के 330 जिलों में लागू थी। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने दो दिन पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिल कर देश के सभी जिलों में यह योजना लागू करने की मांग की थी।
20 हजार करोड़ खर्च होंगे :
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में देश के शष 265 जिलों में भी अगले वर्ष एक अप्रैल से यह योजना लागू करने का निर्णय लिया गया। ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद ¨सह ने कहा, पूरे देश में यह योजना लागू करने पर 20,000 करोड़ खर्च होंगे। इस पर भ्रष्टाचार और घोटालों की छाया भी पड़ चुकी है। एक अंग्रेजी पत्रिका ने राजस्थान और मध्यप्रदेश पर पेश विशेष रिपोर्ट में यह खुलासा किया है।
इस रिपोर्ट के अनुसार : * 30-60 फीसदी फंड का दुरुपयोग या अन्य कार्ये में इस्तेमाल,
* श्रमिकों को भुगतान में देरी या न्यूनतम मजदूरी का भुगतान नहीं,
* अनियमित काम और जातिवाद का बोलबाला
* प्रोजेक्ट की मंजूरी और लागू होने में काफी समय लगना।
एक नजर में योजना * शुरुआत: 2 फरवरी 2006
* मुख्य प्रावधान: ग्रामीण परिवारों के कम से कम एक सदस्य को 100 दिन का रोजगार।
* बढ़ा दायरा: प्रथम चरण में 200 जिले और 11,300 करोड़ रुपए का बजट। वर्ष 2007-8 के बजट में योजना का विस्तार 330 जिलों तक किया।
* लाभान्वित लोगों की संख्या: प्रथम चरण में 2.10 करोड़ ग्रामीणों को रोजगार।
'यह योजना लागू करने में फंड की कमी का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि यह एक कानून है।' -रघुवंश प्रसाद सिंह, ग्रामीण विकास मंत्री