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दशम ग्रंथ बनाम गुरु ग्रंथ साहिब

चंडीगढ़. दशम ग्रंथ का लिखारी कौन? का दूसरा भाग शुक्रवार रिलीज कर दिया गया। इस मौके पर प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. एच. एस दिलगीर और खालसा पंचायत कमेटी के संयोजक आर. एस.खुराना ने आरोप लगाया कि दशम ग्रंथ को एक साजिश के तहत श्री गुरु ग्रंथ साहिब के तुल्य किया जा रहा है। डॉ. दिलगीर और खुराना ने कहा, इसे धार्मिक पुस्तक तो क्या एक आम सामाजिक किताब भी कहना उचित नहीं है।

गुरुबाणी से मेल नहीं खाती दशम ग्रंथ की रचना : खुराना ने कहा, पुस्तक की रचनाएं गुरुओ की रचनाओं से मेल नहीं खातीं। पूरे गुरु ग्रंथ साहिब में छह गुरुओं की बाणी दर्ज है और रचना चाहे जिस गुरु की भी हो लेकिन सभी ने शब्द के अंत में 'नानक' शब्द का प्रयोग किया है और जिस गुरु की यह रचना है उसके लिए 'महला' शब्द का प्रयोग किया गया है। जबकि दशम ग्रंथ में कहीं भी ऐसा उल्लेख नहीं है। उन्होंने बताया कि दशम ग्रंथ में अक्सर कवि राम और कवि शाम का जिक्र आता है।

पहले था बचित्तर नाटक : पहले इस पुस्तक का नाम बचित्तर नाटक था, लेकिन चूंकि इस नाम ने सिख साइकी को अपील नहीं की तो इसका नाम बदलकर दशम ग्रंथ कर दिया और प्रचार किया गया कि यह गुरु गोबिंद सिंह जी की बाणी है। डॉ. दिलगीर ने कहा कि धार्मिक पुस्तकों में अध्यात्म का ही प्रचार किया जाता है।

एसजीपीसी का भगवाकरण डॉ. दिलगीर ने आरोप लगाया कि एसजीपीसी का अप्रत्यक्ष तौर से भगवाकरण किया जा रहा है और बादल की जेबों से निकलने वाले प्रधान और जत्थेदारों से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि ये सिख हितों की बात करेंगे। इससे पहले जसबिंदर सिंह दशम ग्रंथ का लिखारी कौन का पहला भाग भी रिलीज कर चुके हैं और तीसरे भाग पर काम कर रहे हैं। दूसरे भाग में उन्होंने कृष्णावतार से संबंधित अध्याय के बारे में लिखा है।





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