कोटा. आयुर्वेद विभाग ने पिछले दिनों जिला आयुर्वेद विभाग से कोटा शहर में हर्बल पार्क लगाने का प्रस्ताव मांगा था। इस पर जिला आयुर्वेद अधिकारी ने तलवंडी के
राजकीय वैद्य दाऊदयाल जोशी औषधालय परिसर में खाली पड़ी भूमि पर हर्बल पार्क बनाने का प्रस्ताव तैयार कर भिजवाया है।
औषधालय परिसर की खाली पड़ी भूमि का उपयोग नहीं हो पाने से लोगों ने इस पर अतिक्रमण करना शुरू कर दिया था। बढ़ते अतिक्रमण को देखते हुए औषधालय के चिकित्सा प्रभारी ने जिला प्रशासन को अवगत कराया तो जिला कलेक्टर के निर्देश पर पिछले दिनों नगर विकास न्यास ने बाउण्ड्रीवाल बनवाई। इसके बाद से अतिक्रमण पर अंकुश लग सका। जिला आयुर्वेद अधिकारी ने औषधालय परिसर में हर्बल पार्क स्थापित किए जाने के लिए पर्याप्त उपलब्ध भूमि को देखते हुए यहां हर्बल पार्क का प्रस्ताव भेजा है।
क्या है प्रस्ताव
* 3 हेक्टेयर में बनेगा हर्बल पार्क
* 3 वर्ष की होगी परियोजना अवधि
* कुल लागत 24 लाख रुपए
चार प्रभाग बनाए जाएंगे पार्क में
* पार्क में शासकीय पादप, गुल्म, लताएं एवं वृक्ष के चार प्रभाग बनाए जाएंगे। यहां संकटग्रस्त प्रजातियों का पौधरोपण किया जाएगा।
* शासकीय पादपों में अश्वगंधा, सनाय, चन्द्रशूर, इसबगोल, कण्टकारी, धन्वयास, यवासा, धृतकुमारी, तुलसी आदि प्रजातियों का रोपण किया जाएगा।
* गुल्म (झाड़ीदार) पादपों में निगरुण्डी, केर, गुग्गुलू, करंज, एरण्ड, जेट्रोफा तथा लता वाले पादपों में अमृता, अपराजिता, दमाबेल, विधारा आदि पादपों का रोपण हर्बल पार्क की चारो तरफ बाउण्ड्री के पास-पास किया जाएगा।
* वृक्ष प्रजाति के पादपों का रोपण भी बाडबंदी के आसपास एवं बीच-बीच में किया जाकर एक प्रदर्शक उद्यान के रूप में स्थापना की जाएगी।
क्या है परियोजना का औचित्य
इस परियोजना के माध्यम से राज्य में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध वनस्पतियों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
किसानों व वैज्ञानिकों को मिलेगी जानकारियां
हर्बल पार्क लगने से औषधीय पादपों के संरक्षण संवर्धन-पहचान, विपणन, प्रोसेसिंग, उत्पादन, ग्रेडिंग संबंध जानकारी प्रात्यक्षिक रूप से किसानों, वैज्ञानिकों, छात्रों, फार्मेसी से जुड़े व्यक्तियों को जानकारियों मिल सकेगी।
* आयुर्वेद विभाग के निर्देश पर तलवंडी के वैद्य दाऊदयाल जोशी आयुर्वेद औषधालय में हर्बल पार्क लगाने के लिए 24 लाख रुपए का प्रस्ताव आयुर्वेद निदेशक को भेज दिया गया है। पार्क विकसित करने के लिए औषधालय परिसर में पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। ’
—पुरुषोत्तमलाल शर्मा, जिला आयुर्वेद अधिकारी