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सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण एअरबेस जामनगर में वायुसेना सुखोई-30 एमकेआई विमान के दो स्क्वॉडर्न खड़े करने जा रहा है। एअरफोर्स की इस रणनीति से न केवल पाकिस्तान पर दबाव बना रहेगा बल्कि अब वायुसेना की मारक क्षमता मध्य एशिया तक हो जाएगी। पहली बार पाकिस्तान बॉर्डर के करीब सुखोई-30 की तैनाती होगी, यहां से कराची शहर के लिए मात्र तीन मिनट की उड़ान है। एअरफोर्स के एक सीनियर ऑफिसर के मुताबिक 2008 के मध्य तक एक स्क्वॉडर्न खड़ा कर लिया जाएगा।
असम में भी दो नए स्क्वाडर्न : सुखोई-30 की गुजरात के जामनगर एयरफोर्स स्टेशन में तैनाती से भारत मध्य एशिया के कई हिस्सों तक अपनी मारक क्षमता बढ़ा सकता है। इसके अलावा असम में भी सुखोई-30 के दो नए स्क्वॉडर्न खड़े किए जा रहे हैं।
अधिकारी के मुताबिक भारत के महत्वपूर्ण एअरबेसेज में से एक जामनगर जल्द सुखोई-30 से लैस हो जाएगा। लगभग सुखोई-30 विमान यहां तैनात होंगे।
जामनगर एअरबेस में भारतीय वायुसेना के पास मिग-29 और जगुआर के स्क्वॉडर्न पहले से हैं। सुखोई-30 की यहां तैनाती से यह फ्रंट अटैक एअरबेस बन जाएगा। वहीं असम के तेजपुर एअरफोर्स स्टेशन में भी 32 सुखोई-30 विमान के दो स्क्वॉडर्न खड़े किए जा रहे हैं।
मध्य एशिया तक नजर1997 से एअरफोर्स में शामिल सुखोई-30 एमकेआई विमान की लंबी दूरी उड़ान भर सकता है। जामनगर में तैनाती से वायुसेना न केवल पाक बल्कि मध्य एशिया के कई हिस्सों पर एयर स्ट्राइक में सक्षम हो जाएगा। मिड एअर रिफ्यूलिंग से इसकी क्षमता को और बढ़ाया जा सकता है।
चाहिए 39, बचे सिर्फ 34.5 स्क्वॉडर्न भारतीय वायुसेना में एअरक्राफ्ट की कमी से स्वीकृत 39 स्क्वॉडर्न से अब मात्र 34.5 स्क्वॉडर्न बचे हैं। साठ के दशक के मिग सीरीज विमानों को फेज आउट करने और नए विमान शामिल न करने से यह समस्या आई है। रक्षा मंत्रालय ने अगस्त में 126 नए एअरक्राफ्ट खरीदने के लिए ग्लोबल टेंडर निकाला है। वहीं 2009 तक एलसीए भी वायुसेना में शामिल हो जाएगा।