जालंधर ढाई साल का होने के बाद भी राहुल को ठीक से बोलने में दिक्कत हो रही थी। घरवालों ने पहले तो गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन जब डाक्टर को दिखाया तो पता चला उसे सुनने में दिक्कत हो रही है। बहरेपन की तरफ बढ़ रहे राहुल की बीमारी की जड़ थी उसके कान में भरी वैक्स। ऐसी ही कान की छोटी बीमारियों को नजरअंदाज करने से बहरेपन, गूंगेपन, तुतलाना और दिमागी बुखार जैसी बीमारियों की शिकायत होती है। सर्वे के मुताबिक हर 12वें व्यक्ति को हियरिंग लॉस की शिकायत है। भारत इसमें लोगों में विश्व में सबसे आगे है।
वैक्स : कान के अंदर 24 मिलीमीटर की एक्सटर्नल ओडिटरी कनाल होती है। इससे निकलने वाले सिवम ग्लैंड की सैक्रीशन से वैक्स बनती है। अधिक मात्रा में होने से कनाल बंद हो जाती है।
नुकसान : सुनने में परेशानी, कान के पर्दो का खराब व फट जाना, सां-सां की आवाज आते रहना, मुंह का टेढ़ा हो जाना, त्वचा को नुकसान 'कै राटोसिस ओपचूरंस'। मुंह की नस को भी डैमेज कर सकती है।
कारण : नाक की हड्डी का टेढ़ा होना, फैक्चर होना, लंबी समय तक खाई जाने वाली दवाइयां, लंबी खांसी, जुकाम व नाक बहना, पर्दे का फटा होना। कान को शरीर का सबसे अधिक सैंसटिव माना जाता है।
क्या न करें : लहसुन का तेल न डालें, उबलने वाली दवाई पर्दे व ईयर ड्रम को नुकसान पहुंचाती है। बड से सफाई न करें, ड्राप्स वैक्स को निकलते नहीं, नर्म करते हैं।
साउंड हियरिंग 2030 : हियरिंग लॉस को गंभीरता से लेते हुए डब्ल्यूएचओ व केंद्र सरकार ने साउंड हियरिंग 2030 प्रोग्राम शुरू किया है जिसके तहत लबढ़ रही हियरिंग की समस्यां का समाधान किया जाएगा।
कान का बहना सुनने की शक्ति को कम करता है और दिमागी बुखार का भी कारण बनता है। इसको गंभीरता से लिया जाना चाहिए। हर प्रकार की कान की बीमारी का इलाज संभव है। कोकलियर इंप्लांट भी एक इलाज है। -डॉ. यश शर्मा, ईएनटी स्पैशलिस्ट
वैक्स बहरेपन का कारण बनती है। इसे क्वैक्स से नहीं निकलवाना चाहिए। साल में कम से कम एक बार वैक्स जरूर साफ करवानी चाहिए। स्टेशन या बस अड्डे पर बैठे कान साफ करवाने वालों से सफाई नहीं करवानी चाहिए।
-डॉ. संजीव शर्मा, ईएनटी स्पैशलिस्ट
कान की कोई भी बीमारी हियरिंग लॉस का कारण बन सकती है। पस भरने से कान की हड्डियां भी खुरनी शुरू हो जाती हैं। यह हड्डियां कान के जरिए दिमाग से भी जुड़ी होती हैं। इलाज ईएनटी स्पैशलिस्ट ही कराना चाहिए।
-डॉ. रविंदर शर्मा, ईएनटी स्पैशलिस्ट