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सांस से पता चल जाएगा शुगर लेवल

दुबई. डायबिटीज के मरीजों को खून में शुगर की मात्रा जांचने के लिए अब बार-बार ब्लड टेस्ट की तकलीफ नहीं झेलनी पड़ेगी। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने श्वास की blood sugarजांच से डायबिटीज का पता लगाने की एक आसान तकनीक ढूंढ़ निकाली है। इस तकनीक से खासतौर पर बच्चों को ब्लड टेस्ट की कष्टदायक प्रक्रिया से बचाया जा सकेगा।

अमेरिकी शोधकर्ताओं ने पाया है कि टाइप वन डायबिटीज से पीड़ित बच्चों के श्वास में मिथाइल नाइट्रेट नामक रसायन की मात्रा अधिक होती है। इस रसायन की पहचान सामान्य ब्रेथ एनालाइजर या प्रदूषण मापक यंत्र से की जा सकती है। अगर श्वास में इस रसायन की मात्रा तय मानक से ज्यादा निकले तो इसका मतलब है कि खून में शुगर का स्तर सामान्य से काफी ज्यादा है।

बच्चों के लिए फायदेमंद : यहां के अल जाहरा मेडिकल सेंटर में इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। सेंटर के वरिष्ठ कंसल्टेंट एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. Êौन गुलजार ने बताया कि डायबिटीज के शिकार छोटे बच्चों के लिए यह तकनीक विशेष रूप से फायदेमंद है। हालांकि उन्होंने व्यापक स्तर पर तकनीक की उपयोगिता को लेकर आशंका भी जताई।

शोध अब भी जारी : यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधकर्ता डॉ. पिएट्रो गालासेटी ने कहा कि ब्लड शुगर की निरंतर जांच आज भी कष्टदायक प्रक्रिया है। लिहाजा शोधकर्ताओं ने इसके लिए और सुरक्षित, आसान उपाय की खोज शुरू कर दी है, ताकि बिना तकलीफ के मरीज के खून में शुगर की मात्रा मालूम की जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदूषण मापक उपकरण की तरह डायबिटीज के मापन के लिए भी एक बेहतर उपकरण बनाया जा सकता है।

सटीक तकनीक
डॉ. गालासेटी ने ब्रेथ एनालाइजर में मिले मिथाइल नाइट्रेट रसायन की मात्रा का मरीजों के खून के नमूने से मिलान किया तो दोनों में ब्लड शुगर और रसायन की अत्यधिक मात्रा में सह संबंध पाए गए। डॉ. गालासेटी ने टाइप वन डायबिटीज से पीड़ित 10 बच्चों पर इस तकनीक का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है।

अभी क्या
मरीजों को खून में शुगर की मात्रा जांचने के लिए बार-बार ब्लड टेस्ट कराना पड़ता है।

अब क्या होगा
टाइप वन डायबिटीज के मरीज के श्वास से निकलने वाले रसायन मिथाइल नाइट्रेट की जांच से शुगर की मात्रा तय होगी।





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