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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior शिवपुरी. पुलिस के बड़े-बड़े दावों की पोल अब खुलती नजर आ रही है। टी वन गड़रिया गिरोह का सक्रिय सदस्य महेन्द्र आदिवासी को पकड़वाने वाले जेल प्रहरी सरमन आदिवासी को इनाम की जगह सजा मिल गई है। पुलिस अफसरों ने इस प्रहरी को जेल विभाग में पदोन्नति के साथ 50 हजार रुपए का इनाम देने की बात कही थी, लेकिन इस प्रहरी को आज तक पदोन्नत तो मिली नहीं बल्कि उल्टे जेल विभाग ने गड़रिया की खोज में जाने पर अनुपस्थित दर्शाकर वेतन काट दिया।
गौरतलब है कि गड़रिया गिरोह का खात्मा करने में शिवपुरी जेल की अहम भूमिका रही है, इस बात को पुलिस के अफसर भी स्वीकारते है। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक साजिद फरीद सापू ने 7 फरवरी 07 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय से शिवपुरी जेलर राजाराम सिंह को पत्र लिखा था, जिसमें श्री सापू ने लिखार्-जेल में पदस्थ प्रहरी सरमन आदिवासी की सेवाओं की आवश्यकता विशेष दस्यु उन्मूलन अभियान में होने से इन्हें एक सप्ताह के लिए पुलिस अधीक्षक कार्यालय से संबद्ध करने का कष्ट करें।
इसके बाद जेलर र ने प्रहरी को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में ड्यूटी पर भेज दिया। जेल सूत्रों का कहना है कि तत्कालीन जेल डीजी आरके दिवाकर ने भी जेलर राजाराम सिंह को फोन पर निर्देशित किया था कि प्रहरी सरमन आदिवासी को गड़रिया गिरोह के सदस्य महेन्द्र आदिवासी को पकड़वाने के लिए भेज दिया जाए।
पुलिस के अफसरों के अनुसार 5 मार्च को टी-वन गड़रिया गिरोह के सक्रिय सदस्य 50 हजार के इनामी डकैत महेन्द्र आदिवासी को तेंदुआ थाने के कोटा नाका के जंगलों से पकड़ा गया था। उस समय डकैत अपनी बहन के कुंआ पर आराम कर रहा था। तभी उसकी बहन गुड्डी उर्फ रेखा बहनोई बारेलाल ने उक्त डकैत को प्रहरी सरमन आदिवासी और उसके भाई नरेन्द्र आदिवासी के जरिए पुलिस को पकड़वा दिया।
तब तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने शिवपुरी जेल में पदस्थ प्रहरी सरमन आदिवासी से कहा कि तुम्हें इसका पुरस्कार मिलेगा साथ ही उन्होंने पदोन्नति का पक्का आश्वासन दिया। इसके बाद पुलिस कप्तान साजिद फरीद सापू का स्थानातंरण हो गया।
इधर जेलर राजाराम सिंह ने जितने दिन प्रहरी सरमन आदिवासी डकैत को पकड़वाने में लगा रहा उतने दिन अनुपस्थित दर्शाकर उसका वेतन काट दिया। जब इस संबंध में प्रहरी सरमन आदिवासी से बात की तो उसने बताया कि छह महीने बीत जाने के बाद आज तक उसे पदोन्नत नही किया गया है। आला अफसर आश्वासन देते है, लेकिन पदोन्नति के बारे में कुछ भी कहने से कतराते है।
क्या कहते हैं अधिकारी
>> अगर प्रहरी ने गड़रिया गिरोह के डकैत महेन्द्र आदिवासी को पकड़वाया है, तो इनाम का हकदार है, पर इस मामले की जानकारी मुझे नहीं है। साजिद फरीद सापू से चर्चा करने के बाद ही कुछ कह सकता हूं। मैं अभी हाल में डीजी बना हूं। प्रहरी को पदोन्नत तभी किया जा सकता है, जब मामले की जानकारी होगी।
हेमन्त सरीन जेल डीजी भोपाल
>> शिवपुरी जेल प्रहरी सरमन आदिवासी ने डकैत महेन्द्र आदिवासी को पकड़वाने में सराहनीय भूमिका अदा की है। प्रहरी को पदोन्नत कराने के लिए जेल विभाग को लिखा है। साथ ही जेल डीजी से चर्चा भी हुई है। मैं खुद प्रहरी को जेल डीजी से मिलवाने के लिए ले जाऊंगा। प्रहरी को पदोन्नत किया जाएगा।
साजिद फरीद सापू कमांडेंट, 25 वीं बटालियन
>> तत्कालीन पुलिस अधीक्षक साजिद फरीद सापू ने फोन पर प्रहरी को डकैत को पकड़वाने में मदद की बात कही थी। लेकिन प्रहरी अधिक दिन तक अनुपस्थित रहा, इसलिए 20 दिन का वेतन काट दिया है। अनुपस्थित रहने की सजा प्रहरी सरमन सिंह आदिवासी को दी गई है।
राजाराम सिंह जेलर, शिवपुरी