जयपुर. जनजाति में आरक्षण के लिए जेल भरो आंदोलन के तहत गुर्जरों का रैला रविवार को ही गिरफ्तारियां देने के लिए रवाना हो गया। करौली जिले से करीब दो
हजार लोगों का जत्था मंगलवार को भरतपुर संभाग मुख्यालय पर गिरफ्तारी देगा। इसके साथ ही अन्य संभाग मुख्यालयों पर भी गिरफ्तारियां दी जाएंगी। आक्रोशित गुर्जरों ने करौली और दौसा जिले में कई जगह दूध की सप्लाई ठप कर दी है।
सवाई माधोपुर जिले में सोमवार से दूध की सप्लाई बंद करने के साथ ही गुर्जर गिरफ्तारी देने के लिए रवाना हो जाएंगे। पैदल जा रहे जत्थे की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस तैनात की गई है। आंदोलन पर नजर रखने के लिए सरकार ने सभी मंत्रियों और सचिवों को जिलों में भेजा है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, स्थानीय निकाय और जिला प्रशासन के कंट्रोल रूम को 24 घंटे काम करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य मुख्यालय पर दो प्रमुख सचिवों सी.एस. राजन, आर.के. मीणा और स्वायत्त शासन सचिव मंजीत सिंह को रिजर्व रखा गया है।
पांच अक्टूबर के बाद दूसरे राज्यों में भी जेल भरो आंदोलन:
आंदोलन की अगुवाई कर रहे कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला ने रविवार को कहा कि गिरफ्तारियां देने के बाद भी यदि 5 अक्टूबर तक सरकार उनकी आरक्षण की चिट्ठी नहीं भेजती है तो अन्य राज्यों के गुर्जर भी अपने-अपने स्थानों पर जेल भरना शुरू कर देंगे। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रवक्ता डॉ. रूपसिंह के अनुसार बैसला ने रविवार को हरियाणा के तिगांव गांव में हुई सभा में यह घोषणा की।गुर्जर नेताओं ने समाज के लोगों से शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से गिरफ्तारियां देने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि जब तक आरक्षण की सिफारिशी चिट्ठी केन्द्र को नहीं चली जाती तब तक राजस्थान का गुर्जर जेलों में ही रहेगा।
गिरफ्तारी देने नहीं पहुंचे तो जुर्माना
दौसा जिले के मूंडघिस्या गांव में शनिवार की रात 25 गांवों की पंचायत में यह फैसला किया गया कि जो लोग गिरफ्तारी नहीं देने जाएंगे उन पर 51 हजार रुपए तक का जुर्माना किया जाएगा। हर घर से एक व्यक्ति को गिरफ्तारी देने के लिए कहा गया है।
दूध का संकट, भाव 40 रुपए किलो
दौसा जिले में दूध की सप्लाई ठप होने से बांदीकुई में रविवार को दूध की जबर्दस्त किल्लत रही। लोग चाय और नौनिहाल दूध को तरस गए। अन्य दिनों की अपेक्षा बाजार में रविवार को 5 प्रतिशत दूध ही आया। किल्लत की वजह से दूध के भाव 40 रुपए किलो तक हो गए।
अपने हक के लिए कहां जाएगा गुर्जर : गुंजल
विधायक प्रहलाद गुंजल ने समाज के हक के लिए पार्टी में बोले तो पार्टी से निकाला, विधानसभा में बोले तो वहां से भी निकाल दिया। सड़क पर आकर युवाओं ने भविष्य मांगा तो उन्हें भी गोलियों से भून दिया। 26 बेटों की मौत का इंसाफ मांगने गुर्जर आखिर कहां जाएगा। उनके पास अब जेलों में जाकर सरकार की छाती पर बैठने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है।
* आरक्षण आंदोलन अब गुर्जरों की आन-बान-शान का मुद्दा बन गया है। अब जेल ही उनका स्थायी बसेरा होंगी।
- हरिसिंह महुआ, पूर्व सरकारी मुख्य सचेतक, सदस्य कोर ग्रपु
* सरकारी अधिकारी भड़काऊ बयान देकर स्थिति बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
-मुखिया गुर्जर, अध्यक्ष राष्ट्रीय पथिक सेना
* आरक्षण का फैसला होने तक गुर्जर प्रदेशभर में दूध की सप्लाई बंद रखेंगे। इसके लिए चाहे जितना नुकसान उठाना पड़े, उठाएंगे।
-डॉ. विक्रमसिंह गुर्जर, राजस्थान युवा गुर्जर महासभा