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खुद रची थी अपहरण की साजिश

भोपाल. इंजीनियरिंग प्रथम वर्ष के छात्र के अपहरण को लेकर पिछले सात दिन से चल रहे घटनाक्रम का रविवार को नाटकीय पटाक्षेप हो गया। छात्र खुद थाने पहुंचा और उसने जो कहानी पुलिस को बताई उससे पता चला कि पढ़ाई से बचने के लिए उसने ही यह ड्रामा किया था।

फिरौती के लिए मांगे थे पांच लाख रुपए:
कोरबा निवासी कामता प्रसाद बिट्स कालेज में प्रथम वर्ष का छात्र है। वह कल्पना नगर में किराए के मकान में रहता है। 25 सितंबर को होशंगाबाद से किसी व्यक्ति ने कामता प्रसाद के पिता दरसराज को कोरबा फोन करके उनके बेटे के अपहरण की जानकारी दी और फिरौती में पांच लाख रुपए मांगे थे। दरसराज नेशनल थर्मल पावर प्लांट में नौकरी करते हैं।

अपहरण की सूचना मिलने पर पिपलानी पुलिस भी हरकत में आई और कामता प्रसाद की तलाश में जुट गई। रविवार की सुबह कामता प्रसाद के अपहरण में अचानक नया मोड़ उस समय आ गया, जब कामता पिपलानी इलाके में अर्ध बेहोशी की हालत मिला। उसके हाथ पर एक मोबाइल नंबर लिखा हुआ था।

उसने एक व्यक्ति से वह नंबर लगाने को कहा। यह नंबर उसके दोस्त संतोष का था। संतोष पुलिस को लेकर मौके पर पहुंचा। थाने में कामता से पूछताछ की गई। पहले तो वह पुलिस को गुमराह करता रहा, लेकिन बाद में उसने कथित अपहरण का खुलासा कर दिया।

पूछताछ में कामता ने पुलिस को बताया कि वह पढ़ना नहीं चाहता, इसलिए उसने अपहरण की योजना बनाई। योजना के तहत वह गणोश विसर्जन के दिन भोपाल से इटारसी फिर होशंगाबाद गया। होशंगाबाद से उसने आवाज बदलकर अपने पिता को फोन किया और ट्रेन से इंदौर चला गया। कामता 5 सितंबर को ही कोरबा से भोपाल आया है। उसने 19 सितंबर से कालेज जाना शुरू किया था।

पहले भी किया था आत्महत्या का एसएमएस:
बताया गया है कि तीन महीने पहले उसने पिता को एसएमएस किया था, जिसमें लिखा था कि वह बिलासपुर की एक होटल में आत्महत्या करने वाला है। परिजन परेशान होकर बिलासपुर पहुंचे थे। कामता को पुलिस ने उनके परिजनों के साथ कोरबा भेज दिया है।

पिता बनाना चाहता है इंजीनियर:
कामता प्रसाद के पिता उसे इंजीनियर बनाना चाहते हैं। उन्होंने बैंक से कर्ज लेकर उसका एडमिशन बिट्स कालेज मे कराया था। वह उनका इकलौता बेटा है।





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