कोटा. घरेलू गैस की किल्लत और कालाबाजारी पर रोक लगाने के मकसद से रसद विभाग ने गैस के व्यावसयिक इस्तेमाल पर अंकुश लगाने की तैयारी कर ली है। इसके तहत मैसों का सर्वे शुरू कर दिया गया है।
शहर में घरेलू का गैस का बड़े स्तर पर व्यावसायिक गतिविधियों में धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। इसे रोकने के लिए बार बार उठाए गए कदम नाकाफी साबित हुए हैं। आमतौर पर तीन दिन में घर पहुंचने वाली गैस 15 से 20 दिन बाद पहुंच रही है। इससे गृहणियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। घरेलू गैस का वाहनों, मैसों, होटलों, वैल्डिंग की दुकानों आदि में इस्तेमाल हो रहा है।
पिछले दिनों आईओसी के सतर्कता दल के अधिकारियों के सामने हुए हंगामे के बाद गैस कंपनियों ने भी घरेलू गैस के व्यावसायिक इस्तेमाल को रोकने के लिए कई संस्थानों की जांच की। इसके बावजूद भी हालत जस के तस बने हुए हैं।
रसद विभाग के सूत्रों का कहना है कि सभी मैसों का सर्वे कराया जा रहा है। इससे यह पता चल सकेगा कि कौनसी मैस पर कितने छात्रों का भोजन पकता हैं। इसके बाद यह तय किया जाएगा कि एक व्यक्ति का भोजन पकाने के लिए प्रतिमाह कितनी गैस की आवश्यकता पड़ती है। उसी आधार पर मैसों को अपने यहां व्यावसायिक सिलेंडर रखने होंगे। फिलहाल यह पता नहीं चल पा रहा है कि कितनी मैस संचालित हैं और वहां कितने छात्र खाना खाते हैं। रसद विभाग ने क्षेत्रवार मैसों की सूची बनानी भी शुरू कर दी है।
मैसों के सर्वे के लिए दो दल बनाए गए हैं। सर्वे पूरा होने के बाद विभाग मैस संचालकों से व्यावसायिक सिलेंडर का इस्तेमाल करने की अपील करेगा। इसके बाद लगातार मैसों की जांच की जाएगी। जांच में यदि घरेलू गैस का इस्तेमाल होता हुआ पाया जाता है तो उसका कनेक्शन रद्द कर दिया जाएगा।
मांगे जा रहे हैं राशनकार्ड
गैस कंपनियां अब उपभोक्ताओं से गैस बुक कराने के वक्त राशनकार्ड साथ लाने के लिए बाध्य कर रही हैं। इसके पीछे घरेलू गैस सिलेंडरों का दुरुपयोग रोकना है।