भोपाल. मिसरोद इलाके में रविवार की शाम दक्षिण एक्सप्रेस से कटकर एक ही परिवार के चार सदस्यों ने खुदकुशी कर ली। इस हादसे में परिवार का एक दस वर्षीय बच्च गंभीर रूप से घायल है। उसका अरेरा कालोनी स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज चल रहा है। इस परिवार के मुखिया का अपने पिता और भाई से संपत्ति के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा था।
रविवार शाम करीब पौने पांच बजे नागपुर से भोपाल आने वाली दक्षिण एक्सप्रेस जब मिसरोद अंडर ब्रिज से गुजर रही थी तभी सामने पटरी पर पांच लोग उसके सामने आ गए। हृदयविदारक इस हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। वहां चार लोगों की लाश पड़ी थीं। एक दस साल का बच्च गंभीर रूप से घायल था।
बच्चे ने पुलिस को बताया कि वह ग्राम अमौदा, गौहरगंज निवासी सोनू लोवंशी है। उसके साथ उसके पिता रामनाथ, मां कृष्णाबाई, भाई दीपक (20) और बहन भारती (15) थे। सभी लोग घर से आत्महत्या करने के लिए ही निकले थे। इतना बताने के बाद वह बेहोश हो गया। उसका नर्मदा अस्पताल में इलाज जा रहा है।
भाई से चल रहा था विवाद:
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि रामनाथ मूल रूप से मंडीदीप की स्कवायर कालोनी का रहने वाला था। उसका अपने भाई संतोष से बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा है। कुछ दिनों से वह गौहरगंज क्षेत्र में रहने लगा था। जुलाई में रामनाथ ने अपने साले के बेटे विनोद और संजय से भाई संतोष और उसकी पत्नी पर हमला कराया था।
इस मामले में पुलिस ने संतोष और विनोद पर जानलेवा हमला करने और रामनाथ पर साजिश रचने के मामले में कार्रवाई की थी। आत्महत्या को इस पूरे विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। राजधानी पुलिस की टीम मंडीदीप और गौहरगंज गई है।
पिता, भाई और वकील के मुंशी का दबाव था:
घायल सोनू ने पुलिस को बताया कि उसके पिता पर उसके चाचा संतोष और दादा गनपत का काफी दबाव था। गनपत के मंडीदीप में दो मकान हैं, इसमें एक पहले से संतोष के पास है। संतोष और गनपत ने कुछ दिन पहले रामनाथ को कुछ भी देने से मना कर दिया था।
इसके बाद से संतोष के वकील का मुंशी केशराम भी रामनाथ पर दबाव डाल रहा था कि उसे 307 के मामले में सजा हो जाएगी। इससे घबराकर पूरे परिवार ने यह कदम उठाया।
मौत को करीब से देखा सोनू ने
दस वर्ष के सोनू लौवंशी ने मौत को मात दी है। उसने परिवार की आत्महत्या की जो कहानी बताई वह दिल दहलाने वाली है। सोनू ने बताया कि छोटा होने के कारण उसके एक तरफ दोनों भाई बहन थे और दूसरी तरफ माता-पिता। वह बीच में था। वह लोग दोपहर तीन बजे गौहरगंज से बस में बैठकर मिसरोद आ गए थे।
ट्रेन को आते देखकर वे लोग पटरी पर सो गए। इसके बाद ट्रेन आई और सब कट गए। उसे महसूस हुआ कि उसे जोर का झटका लगा। इसके बाद वह बेहोश हो गया। उसके दाएं पैर और दाएं हाथ में फ्रेक्चर हुआ है। अस्पताल पहुंचे एएसपी अरविंद सक्सेना ने उसे दिलासा दिलाया कि वह घबराए नहीं पुलिस उसका इलाज भी कराएगी और न्याय भी दिलाएगी।