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..फिर भी जिंदा हैं हौसले

कोटा. जिंदगी जीने की जिद उम्र के अंतिम पड़ाव पर उन्हें यहां खींच कर ले आई। अपने ही उम्रदराजों को देखकर उनकी हिम्मत दुगुनी हो गई। जीवन की सांझ मे oldageभी स्वाभिमान की लालिमा उनके चेहरों पर पढ़ी जा सकती है। साठ-सत्तर साल की उम्र में जब जीवन में खालीपन महसूस होने लगता है, तब ये बुजुर्ग यहां आकर एक नए संयुक्त परिवार में घुल-मिल जाते हैं। यहां अमीर-गरीब में कोई फर्क नजर नहीं आता है। आश्रम जैसे शांत वातावरण में व्यवस्थित दिनचर्या बुजुर्गो के मन को सुकून दिलाती है। किसी के बीमार हो जाने पर वे एक दूसरे का दुखदर्द भी बांट लेते हैं। बुजुर्गों के इस अनूठे संयुक्त परिवार में किसी को अकेलेपन की टीस महसूस नहीं होती है।

श्रद्घा में कई धाम
झालावाड़ रोड़ स्थित श्रद्घा आश्रम में बुजुर्गो के आवास के लिए दानदाताओं के सहयोग से 100 कमरे बनाए गए हैं। भवन के हर ब्लाक को अवधधाम, ब्रजधाम, श्रीनाथधाम, कैलाशधाम, गोकुलधाम, द्वारकाधाम, गंगाधाम, पालितानाधाम जैसे नाम दिए गए हैं। प्रत्येक कमरे में सुबह-शाम भजन सुनने के लिए स्पीकर लगाए गए हैं। बुजुर्ग टीवी पर रामायण और महाभारत सीरियल भी देखते हैं। इस समय यहां 30 बुजुर्ग रह रहे हैं जिनमें 18 महिलाएं और 12 पुरूष हैं।





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