अजमेर. कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार सामान्य वर्ग के गरीबों को आर्थिक आरक्षण देने के लिए आयोग
का गठन करने की घोषणा कर जनता के साथ छलावा कर रही है। प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व-परिवर्तन में अपनी भूमिका से इन्कार करते हुए गहलोत ने सफाई दी, यह फैसला पूरी तरह आलाकमान का है। रविवार सुबह सर्किट हाउस में पत्रकारों से गहलोत ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय ही कैबिनेट ने इस पर निर्णय ले लिया था।
भाजपा सरकार को सिर्फ अपनी सिफारिश केंद्र सरकार को भेजनी है। सरकार अब आयोग का गठन कर रही है, इससे निश्चित तौर पर प्रदेश में एक बार फिर जातीय संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की विश्वसनीयता समाप्त हो चुकी है। गुर्जर समाज के जेल भरो आंदोलन पर उन्होंने कहा कि सरकार गलती पर गलती कर रही है। सरकार को चाहिए कि गुर्जर समाज के लोगों से बात करे ताकि प्रदेश में अशांति का माहौल नहीं बने।
अध्यक्ष बदलने का फैसला आला कमान का
उन्होंने प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर उन पर लगाए जा रहे आरोप को नकारते हुए कहा कि यह फैसला पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी का था। आम जनता और मीडिया से पीसीसी की कार्यशैली के संबंध में आ रहे मैसेज के बाद अध्यक्ष बदलने का फैसला किया गया। उन्होंने कहा कि सीपी जोशी को अध्यक्ष बनाने के बाद उन पर डॉ. बीडी कल्ला को हटवाने का आरोप लगाया जा रहा है जो गलत है। कल्ला और हरेन्द्र मिर्धा भी मेरे उतने ही करीबी हैं, जितने रामनारायण चौधरी व जोशी। उन्होंने कहा कि पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन से जाट समाज या दूसरे किसी समाज में असंतोष नहीं है। कुछ लोग निजी स्वार्थ के कारण विरोध करें तो उसका कोई फर्क नहीं पड़ता।
मील की हवेली पर जवाब दे सरकार
गहलोत ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से जवाब मांगा कि आखिर किस कानून के तहत सरकार ने राजस्थान जाट महासभा के अध्यक्ष राजाराम मील की हवेली को तोड़ा। उन्होंने कहा कि हवेली बहुत पुरानी थी। यह पोद्दार हवेली के नाम से विख्यात थी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने मील से दुश्मनी निकालने के लिए नियम कायदे की अनदेखी की। वसुंधरा राजे ने मील से नाराजगी का इस तरह बदला लेकर सीएम पद की मर्यादा को धूमिल किया है।
गरीब व अल्पसंख्यक विरोधी
उन्होंने सरकार पर गरीब व अल्पसंख्यक विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार के इशारे पर स्वतंत्रता सेनानी और विधायक पीटे जा रहे हैं। इसका विरोध करने पर अल्पसंख्यक वर्ग से युवाओं को पुलिस चुन- चुन कर मार रही है। लाठियां और गोलियां चलाए बगैर सरकार किसी की बात नहीं सुनती।