अजमेर. अमूमन बड़ी दुर्घटनाओं के बाद अस्पतालों में खून की कमी हो जाती है और ऐसे हालात में अधिकतर मौतों की वजह ज्यादा रक्त बह जाना होती है। रक्तदान
के प्रति लोगों को प्रेरित करने के लिए दुनिया भर में कई प्रयास किए गए हैं और आगे भी किए जाते रहेंगे। इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा आज देश भर में मनाया जाने वाला ‘विश्व रक्तदान दिवस’ इसी कड़ी का एक हिस्सा कहा जा सकता है।
कई प्रयासों के बावजूद आज भी लोगो में रक्तदान के बारे में भ्रांतियां हैं। वे मानते हैं कि रक्तदान से उनका स्वास्थ्य खराब होगा। कई ऐसे भी हैं जो रक्त निर्माण की प्रक्रिया को जटिल मानते हुए समझते हैं कि दान में दिया गया रक्त फिर से बनाने के लिए हमारे शरीर को काफी समय लगता है। इससे उनकी सेहत भी बिगड़ सकती है। इन्हीं वजहों से आज भी कई बार अस्पतालों में रक्त न मिल पाने की वजह से मरीज की जान चली जाती है। अगर थोड़ी सी सावधानी बरती जाए तो दान की गई रक्त की हर बूंद दाता को फायदा ही पहुंचाती है।
24 घंटे में रिकवरी
रक्तदान का सबसे फायदा है कि इससे हमें कोई नुकसान नहीं होता। यह काम अंग दान करने जितना कठिन नहीं है, क्योंकि दान में दिया गया रक्त हमारा शरीर 24 घंटे में फिर से बना लेता है। तीन से छह महीने के अंतर पर फिर से रक्त दान किया जा सकता है।
- डॉ. आरके बोयल मेडिकल ज्यूरिस्ट, जेएलएन अस्पताल
यह हैं फायदे
* रक्तदान से बोन मैरो स्टीम्यूलेट होती है, नतीजा मजबूत हड्डियां।
* आपका दिया खून किसी की जान बचा सकता है।
* क्तदाता के शुगर और दूसरी गंभीर बीमारियों से बचने के अवसर बढ़ जाते हैं।
* आरबीसी की उम्र 120 दिन होती है, इसलिए उसे दान करने में कोई नुकसान नहीं है।
और ये भ्रांतियां
* रक्तदान से कार्यक्षमता नहीं घटती।
* इससे कमजोरी भी नहीं आती।
* सावधानियां बरते जाने से रक्तदाता किसी बीमारी के शिकार भी नहीं होते।
रक्तदान से पहले इसका रखें ध्यान
* रक्तदाता की उम्र 18 से 60 वर्ष के बीच हो।
* दाता का वजन कम से कम 45 किलोग्राम हो।
* उसकी पल्स रेट 60 से 100 प्रति मिनट के बीच हो।
* पिछली बार रक्तदान किए उसे चार महीने हो चुके हों।
* रक्तदान करते समय उसका ब्लड प्रेशर सामान्य (120/80 मिमी ऑफ मर्करी) रहे।
* रक्तदाता एड्स, हेपेटाइटिस या किसी अन्य संक्रमक रोग से पीड़ित न हो।
कुछ तथ्य
* मनुष्य के शरीर में पांच से छह लीटर तक खून होता है
* एक यूनिट रक्तदान में सिर्फ 3-4 सौ मिली खून ही लेते हैं।
* एशिया में गर्भावस्था के दौरान होने वाली महिलाओं की मौतों में 31 प्रतिशत रक्त की कमी या इससे संबंधित रोगों की वजह से होती हैं।