भोपाल/ इंदौर. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के स्वयं सेवक अब चुनावी गतिविधि में हिस्सा नहीं लेंगे। हालांकि वे निजी स्तर पर प्रचार में शामिल हो सकते हैं। साथ ही भाजपा की मांग पर संघ के प्रचारकों को पार्टी में भेजना जारी रहेगा। इस आशय के निर्णय इंदौर में संघ परिवार और भाजपा की बैठक के अंतिम दिन रविवार को लिए गए।
जानकारी के अनुसार बैठक में आरएसएस के सरकार्यवाह मोहन भागवत ने कहा कि संघ के स्वयं सेवक चुनावी गतिविधियों में हिस्सा नहीं लेंगे। इस निर्णय के बाद माना जा रहा है कि चुनाव के समय प्रचार में सक्रिय रहने वाले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के स्वयं सेवक अब राजनीति में हिस्सा लेते नजर नहीं आएंगे।
सूत्रों का कहना है कि संघ ने ऐसा फैसला स्वयं सेवकों में सियासत में बढ़ती दिलचस्पी के मद्देनजर किया है। किसी तरह की गलतफहमी न हो इसलिए लगे हाथ संघ ने यह बात भी साफ कर दी है कि वह भाजपा की मांग पर अपने प्रचारकों को पार्टी में भेजने का काम पूर्ववत जारी रखेगा। इसके अलावा यह भी कहा गया कि स्वयं सेवक चाहें तो निजी स्तर पर चुनाव प्रचार में हिस्सा ले सकते हैं।
भाजपा और संघ की इस संयुक्त बैठक में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नरेंद्र तोमर, संगठन महामंत्री माखन सिंह, उपाध्यक्षद्वय अनिल माधव दवे व विजेंद्र सिंह सिसौदिया समेत संघ परिवार के 27 अनुषांगिक संगठनों के प्रमुख और लगभग पौने दो सौ प्रतिनिधि मौजूद थे।
भाजपा में संघ के प्रचारकों की आमद बरकरार रहने से यह बात पुन: तय हो गई है कि भाजपा संगठन और सरकार पर संघ अपनी पकड़ पहले की तरह बनाए रखेगा। उल्लेखनीय है कि संघ ने दो वर्ष पूर्व भी स्वयं सेवकों को चुनाव प्रचार में हिस्सा लेने से रोकने का निर्णय किया था। उस पर अब अमल किया जा रहा है।