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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. शहर की आबादी करीब 5 लाख है। इनमें से 10 फीसदी आबादी कालोनियों में बसती है। जिले में तैनात 1200 पुलिस कर्मी कानून-व्यवस्था, पेट्रोलिंग व थाने के कार्यो के लिए पर्याप्त नहीं हैं। शहर में पर्याप्त पेट्रोलिंग नहीं हो पाती, वहीं शहर से बाहर बसी कालोनियों में पेट्रोलिंग पार्टियां पहुंचती ही नहीं, जिसके कारण यहां चोरों को वारदात करने में आसानी होती है।
तत्कालीन एसएसपी अरुणदेव गौतम ने कालोनाइजरों को सलाह दी थी कि कालोनी बनाने से पहले पुलिस की अनुमति लेनी पड़ेगी। कालोनाइजर एक्ट में भी पुलिस की अनुमति लेने का नियम है। बिल्डर व कालोनाइजर कोलानी बसाने से पहले पुलिस से अनुमति लेते हैं, लेकिन उसका पालन नहीं करते। इसके चलते इन कालोनियों में चोरी की घटनाएं बढ़ने लगी हैं।
पखवाड़े भर पहले मिनोचा कालोनी के एक व्यवसायी के घर डकैतों ने घुसने का प्रयास किया। व्यवसायी के जाग जाने पर आरोपी फरार हो गए। इसी तरह विवेकानंद कालोनी निवासी एनटीपीसी कर्मी के घर कुछ हथियार बंद लोग घुस गए थे। यहां उन्हें ज्यादा सामान नहीं मिल सका था, लेकिन आरोपियों ने राड से हमला कर एनटीपीसी कर्मी को घायल कर दिया था।
इसके अलावा शुभम विहार निवासी बार कौंसिल के सचिव के सूने मकान में ढाई लाख रुपए की चोरी हुई थी, साथ ही सिरगिट्टी के रिटायर्ड रेलवे कर्मी के घर एक लाख की डकैती की घटना हुई है। और इसी तरह न जाने कितनी ही वारदातों को चोरों ने अंजाम दिया है। शहर से बाहर स्थित इन कालोनियों में पुलिस व कानून के हाथ नहीं पहुंचते।
चोर आराम से यहां पर वारदातों को अंजाम देते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण कालोनियों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की कमी है। शहर से बाहर होने के कारण यहां पुलिस पेट्रोलिंग पार्टी भी नहीं पहुंचती। गश्त पार्टी भी काम से बचने के लिए रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड के पास दिखती है। इसका एक और कारण अधिकारियों का भय है।
पाइंट में नजर नहीं आने पर पेट्रोलिंग पार्टियों को अधिकारियों की डांट सुननी पड़ती है। इसके चलते पेट्रोलिंग पार्टी शहर के भीतर ही घूमती-फिरती रहती है, जिससे वे अधिकारी की नजर में काम करते हुए दिखें। जैसे-तैसे रात 3 बजने के बाद पेट्रोलिंग पार्टियां लौट जाती हैं। कालोनियों के अलावा कई मोहल्लों में भी चोरों ने ऐसी जगहों को निशाना बनाया जहां पेट्रोलिंग पार्टी नहीं पहुंच पाती।
मेलजोल न होना भी एक कारण
कालोनियों में लोगों के बीच पारस्परिक मेलजोल न होना भी अपराध होने के एक कारण है। अमूमन कालोनीवासी अपने पड़ोस में रहने वाले लोगों को भी नहीं पहचानते। न ही उनसे कोई मेलजोल रखते हैं। जब कोई एक परिवार घर सूना छोड़कर कहीं जाता है, तो घर की निगरानी करने वाला कोई नहीं होता। इसके कारण चोर सूना मकान देखकर घुस जाते हैं।
चोरियां
जनवरी 107
फरवरी 101
मार्च 96
अप्रैल 100
मई 138
जून 120
जुलाई 78
अगस्त 67
अब तक की वारदातें
शुभम विहार: बार कौंसिल के सचिव के घर ढाई लाख की चोरी
विवेकानंद कालोनी: एनटीपीसीकर्मी के घर डकैती का प्रयास
सिरगिट्टी: रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी के घर एक लाख की डकैती
मिनोचा कालोनी: मेडिकल एजेंसी संचालक के घर दो लाख की चोरी
शिवम विहार: सूने मकान से लाखों की चोरी
कासिमपारा: रेलवे हास्पिटल के डाक्टर के मकान से लाखों का माल पार
देवनंदननगर: एनटीपीसीकर्मी के सूने मकान से दिनदहाड़े 50 हजार की चोरी
देवरीखुर्द: स्पंज आयरन फैक्ट्री के मैनेजर के घर एक लाख रुपए की चोरी
देवरीडीह: किराना दुकान संचालक के घर से एक लाख का माल पार
मिनोचा कालोनी: व्यवसायी के घर डकैती का प्रयास
अशोक विहार: कथक नृत्यांगना के घर लाखों की चोरी