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इंजन न चलाने ड्राइवर हो रहे लामबंद

बिलासपुर. दबाव बनवाकर चलवाए जा रहे डब्ल्यूएजी 9 इंजन चलवाने का मामला सामने आने के बाद अब प्रभावित ड्राइवर भी खिलाफ में खड़े होने की तैयारी में हैं। कंट्रोलर को लिखित सूचना देकर उन सभी ने अब इंजन चलाने से मना करने करने का निर्णय आपस में ले लिया है।

स्वीडन के एबीबी कंपनी के डब्लूएजी 9 इंजन अपने जाने में भी चल रहे है। चलने वाले इंजनों की संख्या प्रतिदिन 15 से 30 के आसपास है और इसे चलाने के लिए 45 से 90 ड्राइवर व अस्टिेंट ड्राइवरों का रोज उपयोग हो रहा है।

रेल बोर्ड के नियमों के मुताबिक इन्हें चलाने के लिए ड्राइवरों को प्रशिक्षण व दक्षता प्रमाणपत्र दिया जाना आवश्यक है। जोन में इन नियमों को दरकिनार कर ड्राइवरों से काम कराया जा रहा है। प्रावधान के मुताबिक बिना प्रमाण पत्र के अगर इंजन को चलाते समय कोई दुर्घटना हो जाती है, तो ड्राइवर के खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज हो सकता है।

इस मामले का खुलासा हो जाने के बाद अब ड्राइवर लामबंद होने लगे हैं। कोरबा में इस इंजन का सबसे ज्यादा उपयोग होने के कारण इसे चलाने वाले ड्राइवरों की संख्या भी कोरबा में ही ज्यादा है। वहां इनकी संख्या तकरीबन 42 है।

इसके अलावा बिलासपुर, रायगढ़, बृजराजनगर, बिजुरी, रायगढ़ व शहडोल को मिलाकर इनकी संख्या 150 के आसपास पहुंच जाती है। नाम न छापने की शर्त पर एक लोको निरीक्षक ने बताया कि यह सभी ड्राइवर अब बिना प्रमाणपत्र के इस नए इंजन को न चलाने का निर्णय ले लिया है और इस मसले को लेकर इनके बीच बैठकों का दौर भी जारी है।

ड्राइवरों के बीच अपने-अपने क्षेत्र के कंट्रोलरों को लिखित सूचना देकर डब्ल्यूएजी 9 इंजन में चढ़ने से मना करने के लिए सहमति बन गई है। इस स्थिति का सामना रेलवे के अधिकारी कैसे करेंगे और अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन डब्ल्यूएजी 9 इंजनों का यह मामला बिलासपुर मंडल और जोन में तो तूल पकड़ ही लिया है।





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