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फिर इतराया प्याज

जोधपुर. प्याज के भाव ने गरीब की रोटी का जायका ही बिगाड़ दिया है। तेजी से बढ़ते प्याज के भाव से जहां मध्यम वर्ग की गृहणियों का होम बजट गड़बड़ाने लगा onionहै, वहीं कई घरों की किचन व ढाबों से प्याज गायब होता जा रहा है । होटलों के सलाद में भी प्याज नाम मात्र का ही रह गया है। गरीब व मजदूर का पेट भरने के लिए प्याज रोटी की संतुष्टी माना जाता है लेकिन आज वहीं प्याज खरीदने में आंसू आ रहे हैं ।

बरसों तक किसानों को रूलाने के बाद अब प्याज से उपभोक्ताओं के आंसू बहने लगे हैं। पिछले दो महीनों में प्याज के भाव बढ़कर अब सात सौ रुपए मण की उंचाई पर जा पहुंचे है ।1998 का इतिहास दोहराते हुए प्याज नौ साल बाद आम उपभोक्ताओं की रसोई और होटलों के सलाद से बाहर आ गया है। गौरतलब है कि स्थानीय किसानों के पास प्याज का भंडारण भी अब खत्म हो चुका है। कर्नाटक व महाराष्ट्र में बरसात की वजह से आवक कम है। इससे फिलहाल भाव कम होने की कोई उम्मीद भी नहीं है। वहीं लहसुन की कीमत में गिरावट आने से रसाई का जायका पूरी तरह बिगड़ने से बच गया है।

प्याज की पैदावार हुई तब किसानों को आरंभ में कम कीमत मिल रही थी,मगर बाद में दूसरे राज्यों में अच्छी मांग होने पर भाव में तेजी आने लगी। मई में किसानों को जोधपुर की भदवासिया मंडी में 100 रुपए मण कीमत मिल रही थी,जो कि अब बढ़कर 650 रुपए तक पहुंच गई है। यही नहीं नासिक से आने वाला प्याज थोक में 700 रुपए मण बिक रहा है। जबकि पिछले साल इस समय प्याज 75 से 100 रुपए मण में बिक रहा था। भदवासिया मंडी के व्यवसायी हीरालाल ने बताया कि तिंवरी, मथानिया, भोपालगढ़ व अलवर से आने वाले प्याज का स्टॉक खत्म होने लगा है।

हुबली-अकोला से आवक रुकी
कर्नाटक के हुबली व महाराष्ट्र के अकोला से आम तौर पर इन दिनों प्याज पहुंच जाता है,मगर वहां बरसात की वजह से आवक नहीं हो रही है। इस वजह से 1998 के बाद प्याज की कीमत ने इतनी ऊंची छलांग लगाई है।

खुदरा भाव 18 से 27 रुपए
नौ साल बाद भावों में रिकार्ड तेजी आने से आम उपभोक्ताओं को खुदरा में 18 से 27 रुपए किलो तक प्याज नसीब हो पा रहा है। आलम यह कि प्याज की बढ़ती कीमत को देखते हुए लोगों ने उसकी खपत कम कर दी है। भारतीय किसान संघ के माणकराम परिहार ने बताया कि प्याज के भाव में तेजी आने से किसानों को कुछ राहत मिली,मगर अब भंडारण भी अब खत्म होने लगा है।

लहसुन पर लगी लगाम
इससे पहले लहसुन के दाम बढ़ने से आम उपभोक्ताओं का जायका बिगड़ने लगा था,मगर अब दूसरे राज्यों में मांग कम होने से लहसुन के भाव पर अंकुश लगा है। कुछ समय पहले तक लहसुन भदवासिया मंडी में किसानों ने 48 रुपए प्रति किलो कीमत पर बेचा और आम उपभोक्ताओं ने खुदरा में 80 रुपए प्रति किलो खरीदा। पिछले दस दिनों में लहसुन के भाव में 11 सौ रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट आई है। वहीं खुदरा में चालीस से पचास रुपए प्रति किलो बिक रहा है।





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