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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़.अब ब्लड को ज्यादा देर तक प्रिजर्व किया जा सकेगा। पीजीआई इसके लिए नए ब्लड बैग्स अपनाने की तैयारी कर रहा है। इस समय जो बैग इस्तेमाल किए जा रहे हैं, उनमें ब्लड 35 दिन तक सुरक्षित रहता है। नए बैग के आने से ब्लड 45 दिनों तक सुरक्षित रह सकेगा।
पीजीआई की ट्रांसफ्यूजन मेडिसन की हेड प्रोफेसर डॉ. नीलम मरवाहा ने बताया कि नए बैग आने से ब्लड तो ज्यादा समय तक प्रिजर्व होगा ही, प्लाजमा भी ज्यादा निकाला जा सकेगा। इस बैग में खास सॉल्यूशन होता है, जो रेड सेल के साथ मिक्स हो जाता है और उससे ज्यादा प्लाजमा निकाला जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पीजीआई फिलहाल 1000 बैग खरीद रहा है, जिससे ब्लड की वेस्टेज कम होगी और जरूरी ब्लड को 10 दिन ज्यादा स्टोर किया जा सकेगा। फिलहाल फंड्स की कमी से प्रॉब्लम है, पर आगे इसे बड़े स्तर पर अपनाएंगे। पीजीआई में हर साल वॉलंटरी डोनेशन से 36000 यूनिट ब्लड आता है।
चंडीगढ़ में हर साल..>> 55 से 60 हजार यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है>> 60 हजार यूनिट ब्लड आता है>> 75 फीसदी वॉलंटरी ब्लड डोनेशन से >>टारगेट : 100 फीसदी ब्लड वालंटरी डोनेशन से
एक मंच पर होंगे सबसरकारी अस्पतालों के ब्लड बैंक में तालमेल है, पर पूरी तरह से नहीं। इसके लिए एक प्लेटफॉर्म बनाया जा रहा है, जिसमें सभी ब्लड बैंक एक-दूसरे से तालमेल रखेंगे और एक-दूसरे को ब्लड देंगे। फिलहाल प्राइवेट और सरकारी ब्लड बैंक में रेट का फर्क होने से तालमेल का अभाव रहता है।
हेल्पलाइन की तैयारीप्रो. नीलम मरवाहा ने बताया कि इस बात पर विचार किया जा रहा है कि ब्लड के लिए भी एक हेल्पलाइन शुरू की जाए, जिसमें किसी को भी ब्लड की जरूरत होने पर उस नंबर पर संपर्क करेगा। उसे बताया जाएगा कि कहां ब्लड उपलब्ध है। इससे उसे अलग-अलग बैंकों में धक्के खाने की जरूरत नहीं होगी।
लिस्ट तैयारअभी पीजीआई के पास डोनर्स की एक लिस्ट तैयार है। रेयर ब्लड की कमी पड़ने पर, पीजीआई डोनर्स को फोन करता है और गाड़ी भेजकर डोनर को लेकर आता है। यही गाड़ी डोनर को घर भी छोड़कर आती है।