मथुरा/वृंदावन.
उत्तर भारत में पितृपक्ष के समय पूर्वजों की याद में किए जाने वाले श्राद्धकर्म के लिए पंडितों की कमी लोगों को काफी खल रही है। पितृपक्ष श्राद्ध के लिए लोगों की तादाद इतनी अधिक है कि पंडितों की कमी पड़ गई है। आगरा, मथुरा और उत्तरप्रदेश के अन्य इलाकों से आए पंडित यहां ओवरटाइम कर रहे हैं इसके बावजूद लोग पितृपक्ष के श्राद्ध से संतुष्ट नहीं हो पा रहे हैं। पंडितों की कमी लोगों पर भारी पड़ रही है।
पितृपक्ष श्राद्ध के जानकार पंडित महेश शुक्ला ने बताया कि श्राद्ध के दौरान उन्हें एक घंटे के अंतर पर तीन बार भोजन करना होता है। यमुना के किनारे पितृपक्ष श्राद्ध के लिए भारी संख्या में लोग जमा होते हैं। श्राद्ध की शास्त्रीय प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद पंडितों को भोजन कराया जाता है दक्षिणा दी जाती है।
पंडितों की कमी के बारे में पूछे जाने पर वरिष्ट पुजारी हरी मोहन ने बताया कि नई पीढ़ी आधुनिक शिक्षाओं के कारण इस पेशे की ओर आना पसंद नहीं करती है इस कारण पितृपक्ष श्राद्ध के जानकार पंडितों की कमी हो गई है।
एक अन्य पंडित काशी नाथ पांडे ने बताया कि उनके अधिकत यजमान उन्हें 11 से 21 रुपए ही बतौर दक्षिण देते हैं। एक श्राद्ध को पूरा कराने में लगभग दो घंटे का समय लगता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में एक पूजा कराने के लिए 500 रुपए बतौर दक्षिणा दिए जाते हैं।
दूसरी ओर आगरा यूनिवर्सिटी ने ज्योतिष और शास्त्र की पढ़ाई शुरू की है। यह कोर्स पॉपुलर भी हो रहा है क्योंकि विदेशों में रहने वाले भारतीय भी जानकार पंडितों की मांग कर रहे हैं।