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नसीब न हुईं अंतिम सलामी

भिलाई. सीआईएसएफ डीआईजी आफिस प्रांगण में बीती रात हुई घटना की दहशत आज दूसरे दिन भी सीआईएसएफ जवानों के चेहरे पर थी। सुबह से इंतजार था दोनों जवानों के शव का। इसके लिए बल के मेस में श्रृद्धांजलि का इंतजाम किया गया था। लेकिन सूर्यास्त तक शव सेक्टर-3 नहीं भेजे गए।

बल के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि सब इंस्पेक्टर आर. पी. सिंह व कांस्टेबल बलबीर सिंह के शव सेक्टर-9 मरच्यूरी में रखवा दिए गए हैं जिन्हे तड़के रायपुर के लिए रवाना किया जाएगा वहां से फ्लाइट से इन्हें नई दिल्ली भेजा जाएगा।

दूसरे जवानों पर भी फायर
हादसे के दूसरे दिन कुछ और बातें छन कर बाहर आ रही हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक कांस्टेबल बलबीर सिंह ने सब इंसपेक्टर आर.पी.सिंह पर फायर करने के बाद दूसरी तरफ गेट पर पोजिशन लेकर खड़े जवानों पर भी फायर किया था। लेकिन बदकिस्मती से वह मिसफायर हुआ।

इस बात की तस्दीक घटना स्थल से बरामद गोलियों से हुआ। बलबीर के एसएलआर में कुल 13 गोलियां थी जिसमें से फायर की गई 7 गोलियां बरामद कर ली गई हैं। इनमें 2 सड़क पर, 1 पेड़ के पास, 2 गोलियां आर.पी. सिंह के पेट में,1 गोली बलबीर की गर्दन में और 1 मिस फायर में निकली।

तफ्तीश में जुटे अफसर इस बात को लेकर हैरान हैं कि एक तरफ कांस्टेबल बलबीर एसएलआर में 13 गोलियां थी वहीं सब इंसपेक्टर आर.पी. सिंह की पिस्टल में कोई मैग्जिन नहीं थी। सब इंसपेक्टर के पास खाली पिस्टल कैसे थी यह सीआईएसएफ का कोई भी अफसर बता नहीं पा रहा है।

सलामी किसे दें.?
सीआईएसएफ के आला अफसर इस बात को लेकर पशोपेश में हैं कि क्या दोनों जवानों की पार्थिव देह को सलामी दी जाए। दरअसल सब इंसपेक्टर आरपी सिंह सीआईएसएफ और समाज की नजर में ‘शहीद’ हैं और उनकी पार्थिव देह को सलामी दिया जाना स्वाभाविक प्रक्रिया मानी जा रही है। लेकिन हत्या के आरोपी कांस्टेबल के पार्थिव देह को सलामी दी जाए या नहीं इसे लेकर बल के अफसर पशोपेश में हैं।

इस संबंध में आज मीडियाकर्मियों के सवाल को डीआईजी श्री घोष भी बेहद सफाई के साथ टाल गए। अब सीआईएसएफ की तरफ से यह व्यवस्था की जा रही है कि शव सुबह ही फ्लाईट से रवाना कर दिए जाए।

घटना का मूल कारण पता नहीं
दोपहर के वक्त डीआईजी तरुण कुमार घोष ने पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा करते हुए कहा कि दोनों जवानों के बीच सीआर या छुट्टी को लेकर कोई विवाद नहीं था। उन्होंने इस बात पर सहमति जताई कि संभवत: अपने अफसर के व्यवहार को लेकर कांस्टेबल को कुछ नाराजगी रही होगी।

सूर्यास्त ने बदला निर्णय
एक्स-रे और पोस्टमार्टम फिर उसके बाद फोटोग्राफी, इस कार्यवाही में सूर्यास्त हो गया। ऐसे में दोनों जवानों के शव को सेक्टर-3 लाने का निर्णय बदल दिया गया। इधर सेक्टर-3 में मेस के सामनें प्रांगण में पुष्प चक्र और अन्य सामान पहले से लाकर रख दिए गए थे। श्रृद्धांजलि की तैयारियां पूरी थी लेकिन सूर्यास्त हो जाने की वजह से सारी तैयारियां बेकार गई।

बिजली ने रोका एक्स-रे
सुबह सेक्टर-9 मरच्यूरी में औपचारिकता के बाद दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए दुर्ग ले जाए गए। यहां लाने के बाद चिकित्सकों ने शरीर में फंसी गोली की पोजिशन जानने शवों का एक्स-रे करवाने कहा। जब शव जिला चिकित्सालय ले जाए गए तो वहां बिजली गुल हो गई।

इससे शव वापस सेक्टर-9 अस्पताल लाकर दोनों शव के एक्स-रे हुए। इसके बाद शाम 4 बजे शव वापस दुर्ग लाए गए। यहां डॉ. लाल मोहम्मद और डॉ. श्रीमती मिंज की निगरानी में पोस्टमार्टम हुआ। इसके बाद सीआईएसएफ की ओर से दोनों शव के अलग-अलग एंगल से फोटोग्राफ लिए गए।

घर में मातम
सब इंसपेक्टर आर.पी. सिंह का निवास सेक्टर-3 में ही है। घर पर श्री सिंह की पत्नी और बेटी के होने की खबर कुछ जवानों ने दी। जब मीडियाकर्मी उनके घर तक पहुंचे तो पड़ोसियों और दिगर अफसरों ने विनम्रतापूर्वक वहां जाने और परिजनों से बात करने से मीडियाकर्मियों को रोक दिया। बताते हैं कि परिजनों को सुबह ही खबर दी गई।

बाद में परिजनों को सेक्टर-9 ले जाया गया और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए। अफसरों ने बताया कि परिजन भी मंगलवार की सुबह श्री सिंह की पार्थिव देह के साथ दिल्ली जाएंगे।





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