bhaskar Web English
HomeNewsMetrosIndore Indore

मनमाफिक बदलाव नहीं कराए जा सके

इंदौर. मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के सख्त रुख के चलते मास्टर प्लान-2021 में मनमाफिक बदलाव कराने के नेताओं, रीयल इस्टेट कारोबारियों और भू-माफिया के प्रयास विफल हो गए। अफसरों ने भी कोई मदद नहीं की। प्लान को अंतिम रूप दे रहे आवास व पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव और उनकी टीम ने जनहित से जुड़े संशोधन तो स्वीकारे लेकिन नेताओं के मनमाफिक बदलाव से साफ इंकार कर दिया।

सत्तापक्ष के नेताओं द्वारा कुछ वजनदार लोगों की मदद के लिए लगातार दबाव बनाने के कारण मुख्यमंत्री ने प्लान का अंतिम प्रकाशन जल्दी से जल्दी करने के निर्देश दिए। प्रकाशन के बाद किसी मुद्दे पर कोर्ट में चुनौती देने पर फिर से विचार करने को भी सरकार तैयार है लेकिन अभी संशोधन नहीं किया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक इंदौर के मास्टर प्लान को लेकर सरकार में बैठे लोगों पर जैसे आरोप लगते रहे हैं उससे सबक लेते हुए मुख्यमंत्री जनहित से हटकर कोई फेरबदल करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने आवास व पर्यावरण मंत्री जयंत मलैया और प्रमुख सचिव डॉ. देवराज बिरदी को भी इस मंशा से अवगत करा दिया है।

इसी कारण ग्रीन बेल्ट खत्म कराने, सड़कों की चौड़ाई कम कराने, सार्वजनिक और अर्धसार्वजनिक उपयोग की जमीनों का उपयोग बदलने तथा औद्योगिक उपयोग की जमीनों का उपयोग में कुछ बदलाव कराने में किसी को सफलता नहीं मिली। अंतिम प्रकाशन टाउन कंट्री प्लानिंग एक्ट की धारा 19(5) के तहत बगैर आपत्ति बुलाए करने का फैसला भी मुख्यमंत्री का है। उनके एक सचिव ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।

इन्वेस्टर्स समिट के प्रस्तावों को शामिल करके ही अंतिम रूप दें
मास्टर प्लान को सारी प्रक्रियाओं का पालन कर अंतिम रूप देने की पैरवी कर रही लॉबी का दबाव है इसी महीने प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में आने वाले रीयल इस्टेट के प्रस्तावों को भी प्लान में शामिल करने के बाद अंतिम रूप दिया जाए। इंदौर उपभोक्ता संघ ने भी सरकार को दिए ज्ञापन में यह बिंदु प्रमुखता से उठाया है।

संघ ने बायपास पर एक समूह को टाउन कंट्री प्लानिंग एक्ट की धारा 23(क) के तहत 40 एकड़ क्षेत्र में विकास की अनुमति देने को रेखांकित करते हुए कहा मास्टर प्लान में स्थायी प्रावधान करने पर उसी धारा के तहत लैंडयूज बदलने के लिए अलग-अलग अनुमति देना होगी। इससे मास्टर प्लान के औचित्य पर ही प्रश्नचिह्न् लग जाएगा।

महापौर ने कहा स्टेडियम ही बने
पीपल्याहाना में स्टेडियम के लिए आरक्षित जमीन का उपयोग आवासीय करने का महापौर डॉ. उमाशशि शर्मा ने कहा फिर विरोध किया और कहा वहां स्टेडियम ही बनना चाहिए। सांसद सुमित्रा महाजन और विधायक महेंद्र हार्डिया पहले ही मुख्यमंत्री से वहां स्टेडियम बनाने का आग्रह कर चुके हैं।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: