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अपेक्स बैंक के बर्खास्त 56 कर्मचारी बहाल

ग्वालियर. सर्वोच्च न्यायालय ने मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बैंक मर्यादित भोपाल के उन 56 कर्मचारियों की बर्खास्तगी को अवैध ठहराया है, जिन्हें लोकायुक्त की रिपोर्ट के आधार पर सहकारी विभाग के रजिस्ट्रार के आदेश पर बैंक ने बर्खास्त कर दिया था।

सर्वोच्च न्यायालय में इन बैंक कर्मचारियों की ओर से अधिवक्ता कृष्ण मोहन शुक्ला और एसके दुबे के माध्यम से याचिका दायर की गई थी। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा है कि मध्यप्रदेश के लोकायुक्त ने बैंक कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना ही इस आधार पर बर्खास्त करने की सिफारिश की थी कि उनकी नियुक्ति नियमानुसार नहीं की गई।

न्यायमूर्ति तरुण चटर्जी तथा न्यायमूर्ति पी. सदाशिवम ने कहा है कि सक्षम अधिकारी ने लोकायुक्त की उक्त रिपोर्ट सहकारिता विभाग के पंजीयक को अग्रेषित कर दी, जिन्होंने मध्यप्रदेश सहकारी संस्था कानून के नियमों के अनुसार कोई निर्णय लेने के बजाय बैंक के प्रबंध संचालक को यंत्रवत(मैकेनिकली) निर्देश दिया कि इन कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया जाए।

न्यायमूर्ति द्वय ने माना है कि मप्र सहकारी संस्था कानून के तहत इस अपेक्स संस्था के अधिकारी लोकायुक्त के अधिकार क्षेत्र में आते हैं किन्तु इस मामले में निम्न श्रेणी के कर्मचारी हैं तथा क्लर्क कम टाइपिस्ट हैं। उन पर लागू सेवा नियमों का पालन किए बिना वे बर्खास्त नहीं किए जा सकते।

क्या था मामला
अपेक्स बैंक में कांग्रेस समर्थित संचालक मंडल के कार्यकाल में वर्ष 1995-96 में 83 कर्मचारी व 5 अधिकारी कुल 88 बेरोजगारों को नियुक्ति प्रदान की गई थी, किन्तु मप्र में भाजपा के सत्ता में आने के बाद ही 56 कर्मचारियों को सुनवाई का अवसर प्रदान किए बिना 27 जुलाई 04 को बर्खास्त कर दिया गया था। उक्त कर्मचारियों की सेवाएं लगभग 9 वर्ष की हो गई थी, जिनमें से अधिकांश ओवरऐज भी हो गए हैं।

सर्वोच्च न्यायालय के उक्त निर्णय से 56 कर्मचारी पुन: सेवा में बहाल हुए हैं। इनके अलावा 20 कर्मचारियों को जबलपुर हाईकोर्ट से स्टे मिला है एवं 3 कर्मचारियों के प्रकरण हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में लंबित हैं तथा 2 कर्मचारियों का मामला सहकारी अधिकरण में विचाराधीन है।





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