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संदेह की सुई मेटल कोल जंक्शन पर

बिलासपुर. हैकिंग मामले में अब पूरा संदेह मेटल कोल जंक्शन पर ही जाकर टिक गया है। अभी तक सामने आए तथ्यों के हिसाब 8 हजार मिट्रिक टन कोयले की बुकिंग के लिए मिले आदेश पर 80 हजार मिट्रिक टन कोयले की बुकिंग करा दी गई और दबाव बनने पर विवाद खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है।

हैकिंग मामले को लेकर सोमवार को एसईसीएल के सीएमडी बीके सिन्हा ने आला अधिकारियों की बैठक ली। इसमें हुए निर्णय के अनुसार पूरे घटनाक्रम की जानकारी प्रबंधन ने मेटल कोल जंक्शन से चाही है। अधिकारियों से यह पूछा गया कि बुकिंग के दौरान यह चूक कैसे हुई और इसे रोकने के लिए क्या व्यवस्था की गई थी।

आने वाले समय होने वाली बुकिंग में ऐसी चूक नहीं होगी, इसकी क्या व्यवस्था है? पूर्व में तो इस तरह की घटना नहीं हुई और ऐसी कंपनियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? यह कंपनी जब तक यह सारी जानकारी नहीं दे देती, तब तक इसे ई-बुकिंग कराने के अधिकार से वंचित कर दिया गया है।

मेटल कोल जंक्शन के अधिकारियों ने प्रबंधन को रोबोट कंप्यूटर स्क्रिप्ट बुकिंग द्वारा उनके सर्वर पर रोक लगाई थी, जिसके चलते यह स्थिति बनी है। यह मामला अब लगातार उलझता जा रहा है।

प्रकरण को पुलिस को सौंपने के मामले में प्रबंधन का कहना है कि मेंटल जंक्शन के सर्वर में खिलवाड़ हुआ है, अत: पुलिस में शिकायत का मामला उन पर डाल दिया गया है। प्रबंधन ने किसी के खिलाफ भी आपराधिक प्रकरण दर्ज करवाने से अपना पल्ला झाड़ लिया है।

उल्लेखनीय है कि मेटल कोल जंक्शन कंपनी के द्वारा एसईसीएल के कोयले के लिए कराई जा रही ई-बुकिंग में किए जा रहे खिलवाड़ का मामला प्रकाश में आया। मामले के खुलासे के बाद कोल जंक्शन के जरिए हुई 27 सितंबर की बुकिंग को निरस्त कर दिया गया।

मेटल के द्वारा कराई गई जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उस हिसाब से साफ्टवेयर विकसित कर एक तरह से हैकिंग ही ही की गई है और करोड़ों-अरबों रुपए के कोयले पर कुछ कंपनियों ने खरीदा और इस बुकिंग में दूसरों को भाग लेने का मौका नहीं दिया। एसईसीएल के आला अधिकारियों ने इस मामले में पहले मेटल कोल जंक्शन पर संदेह व्यक्त कर दिया था। सोमवार को इस मामले में फिर कुछ नई जानकारी सामने आ रही है।

जानकार सूत्रों के मुताबिक दुग्गा खदान के स्टीम बी कोयले के लिए एसईसीएल 8 हजार मिट्रिक टन का आफर जारी करने का आदेश दिया। वहीं मेटल कोल जंक्शन ने कंपनी ने इसकी जगह 80 हजार मिट्रिक टन कोयले की बुकिंग करा दी।

सही स्थिति सामने आने के बाद कोयले की बुकिंग कराने वाली कंपनियों ने कोयले की मांग करनी चालू की और इसके चलते इस कंपनी के अधिकारियों द्वारा विवाद खड़ा कर बुकिंग निरस्त करने के लिए व्यूह रचना बनाने की बात सामने आ रही है।

अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इस तरह का खेल चल तो लंबे समय से चल रहा था और मेटल के अधिकारियों व कुछ कोल उपभोक्ताओं की सांठगांठ से करोड़ों के वारे-न्यारे को अधिकारी बता रहे हैं।

प्रतिबंधित भी हुए और कोयला भी नहीं मिला
मेटल कोल जंक्शन की रिपोर्ट पर वैष्णवी ट्रेडर्स, रुचि कोल, संगीता सेल्स प्राइवेट लिमिटेड, सतना कोल, एसजी, ओमप्रकाश अग्रवाल, राधिका ट्रेडर्स, मनोज ट्रेडिंग कंपनी, गर्ग ट्रेडर्स नार्थ वेस्ट प्राइवेट लिमिटेड को प्रतिबंधित किया गया है।

इन पर रोबोट कंप्यूटर द्वारा सेंध लगाने का आरोप हैं। ताज्जुब की बात यह है कि 27 अगस्त को हुई नीलामी में एसईसीएल के आंकड़ों के अनुसार इन दस में से सात फर्मो को कोयला ही नहीं मिला है। ऐसे में इन्हें आरोपी बताना ही संदेह पैदा कर रहा है।





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