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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर.
शहर के सरकारी हास्टलों में बदइंतजामी देखकर ग्रामीण क्षेत्रों के हास्टलों की स्थिति का अंदाजा लगाया जाता है। बिल्हा ब्लाक के ग्राम बगदेवा स्थित आदिवासी बालक छात्रावास की अव्यवस्था देखकर प्रशासन के अधिकारी चकित रह गए, जहां बच्चे भूखे पेट रहकर जैसे-तैसे दिन गुजार रहे थे। यही नहीं, अधीक्षक शराब के नशे में उनसे मारपीट भी करता था। छात्रावास अधीक्षक और वहां के दो शिक्षकों को निलंबित करने की अनुशंसा की गई है।
छात्रावास की अव्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं। जागेंद्र कश्यप, सत्येंद्र कौशिक, कौशल्या पोर्ते सहित लिमहा व बेलतरा के ग्रामीणों ने अतिरिक्त कलेक्टर कमलप्रीत व एसडीएम संजय अग्रवाल से शिकायत की थी कि वहां रह रहे बच्चों को न तो पर्याप्त खाना दिया जाता है और न ही सुविधाएं।
एसडीएम श्री अग्रवाल ने नायब तहसीलदार पीसी कोरी को जांच अधिकारी नियुक्त कर मौके पर भेजा। श्री कोरी वहां की स्थिति देखकर दंग रह गए। छात्रावास में पहली से पांचवीं तक पढ़ने वाले 27 छात्र रहते हैं, जो विभिन्न ब्लाकों के ग्रामों से हैं। छात्रावास में उन्हें सुबह 9 बजे नाममात्र भोजन दिया जाता था। पलंग, मच्छरदानी, चादर, साबुन सहित जरूरी सुविधाएं भी उन्हें नहीं दी जा रही थीं।
इतना ही नहीं, छात्रों ने जांचकर्ता अधिकारियों को बताया कि छात्रावास अधीक्षक विशाल सिंह पोर्ते शराब के नशे में छात्रों से मारपीट भी करता है। वह पाली से आना-जाना करता है। कई दिनों तक छात्रावास आता भी नहीं था। जांच के लिए पहुंचे अधिकारियों को भी वह नदारद मिला।
पूछताछ में पता चला कि अधीक्षक पिछले पांच दिनों से हास्टल नहीं आ रहा है। चौकीदार धन सिंह ने उन्हें बताया कि छात्रों की समस्याओं को लेकर कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अधीक्षक द्वारा ध्यान नहीं दिया जाता। इसी तरह शिक्षाकर्मी धनीराम प्रधान व सहायक शिक्षिका पद्मा डोंगरे भी नदारद मिलीं।
हास्टल के हालात देखने के बाद श्री कोरी ने सोमवार को अधीक्षक सहित दोनों शिक्षकों के निलंबन की अनुशंसा करते हुए जांच रिपोर्ट एसडीएम को सौंप दी। छात्रावास में फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। श्री कोरी ने बताया कि इस पूरे मामले की जानकारी सहायक आदिवासी आयुक्त गायत्री नेताम को भी दे दी गई है।
एक पलंग और तीन बच्चे
हास्टल की अव्यवस्था का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वहां तीन-तीन छात्रों के लिए एक-एक पलंग दिया गया था। ऐसा भी नहीं है कि छात्रावास में पलंग न हों। अतिरिक्त पड़े पलंगों को स्टोर रूम में रखकर ताला लगा दिया गया था। एक पलंग पर तीन-तीन छात्र सोकर रात गुजारते थे।