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न्यू इंडिया इंश्योरेंस पर 4.90 करोड़ हर्जाना

चंडीगढ़. स्टेट कंज्यूमर कमीशन यूटी चंडीगढ़ ने न्यू इंडिया इश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, सेक्टर-17 को 4 करोड़ 90 लाख रुपए हर्जाना देने का फैसला सुनाया है। यह फैसला जस्टिस केसी गुप्ता और मेंबर दिवेंद्रजीत दत्त ने सोनीपत के पवेल गर्ग की कंपनी कॉमबिटिक ग्लोबल की शिकायतों पर सुनवाई के दौरान दिया।

इसलिए हुआ हर्जाना: अप्रैल 11, 2002 को पवेल ने न्यू इंडिया इश्योरेंस कंपनी से दवाइयों के प्रोडक्ट्स की 10 करोड़ रुपए की मैरीन इंश्योरेंस ओपन पॉलिसी ली थी। पॉलिसी के तहत देश-विदेश में प्रोडक्ट्स ले जाते समय उनकी पूरी इंश्योरेंस थी। पवेल की कंपनी ने 2003 जनवरी, फरवरी में 10 लाख 27 हजार 454 यूएस डॉलर का माल रूस भेजा। इंश्योरेंस कंपनी को भी इस बारे में अवगत करवाया, लेकिन कंपनी का माल रूस के सेंट पीटर्सबर्ग तो पहुंचा लेकिन खरीददार तक नहीं।

कहां गया माल: 14 मई 2003 को पवेल को खरीददार की ईमेल मिली, कि कन्साइनमेंट फिनलैंड पोर्ट तक तो पहुंच गया, लेकिन फिनलैंड से सेंट पीटर्सबर्ग नहीं पहुंचा। पवेल गर्ग ने इसकी जानकारी इंश्योरेंस कंपनी को भी दी थी।

जांच भी हुई थी:

न्यू इंडिया इश्योरेंस ने रूस की एक इंश्योरेंस कंपनी से इस मामले पर जांच भी करवाई थी कि आखिर कन्साइनमेंट पहुंचा या नहीं। कंपनी ने जांच में पाया कि माल खरीददार तक नहीं पहुंचा।

एफआईआर भी हुई:

इस मामले को लेकर सेंट पीटर्सबर्ग स्थित पुलिस स्टेशन में एक एफआईआर भी दर्ज करवाई गई थी। न्यू इंडिया इश्योरेंस कंपनी ने कमीशन में कहा कि पवेल गर्ग ने क्लेम पाने के लिए ट्रांसपोर्टर और खरीददार से मिलकर फ्रॉड किया है।

कंपनी ने कहा कि माल गुम होने का पता चलने के तुरंत बाद ट्रांसपोर्टर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

यह कहा कमीशन ने:

कमीशन ने कहा कि पवेल गर्ग और खरीदार ने कोई फ्रॉड नहीं किया है। रूस की इंश्योरेंस कंपनी द्वारा की गई जांच में भी यह बात साबित हो गई है। पवले गर्ग की कंपनी ने न्यू इंडिया को पूरी कॉपरेशन दी। न्यू इंडिया से इस संबंध में पवेल की कंपनी ने सलाह भी मांगी थी। उस समय न्यू इंडिया ने शिपिंग कंपनी/ट्रांसपोर्टर के खिलाफ कोई कार्रवाई करने के लिए भी नहीं कहा।

इस सब को मद्देनजर रखते हुए कमीशन ने न्यू इंडिया को पवले की कंपनी को क्लेम न देने पर डेफिशियेंसी इन सर्विस माना और 2 हजार रुपए प्रति इनवॉयस देने के साथ-साथ 10 लाख 27 हजार 454 यूएस डॉलर बतौर हर्जाना लगाया। यानी की इस रकम को फरवरी 2003 में डॉलर की कीमत जो कि 47.70 के अनुसार कुल 4 करोड़ 90 लाख 9 हजार 555 रुपए अदा करेगी। इस रकम को मार्च 16, 2004 से 9 परसेंट इंट्रस्ट के साथ चुकाना होगा।





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