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रोल नं. ज्यूडिशियरी के, स्टीकर कोचिंग का

चंडीगढ़. रोल नंबर के साथ कोचिंग सेंटर की पब्लिसिटी। वह भी ज्यूडिशियल एग्जाम की। ऐसा ही हुआ है हरियाणा सिविल सर्विसेस की ज्यूडिशियल ब्रांच के प्रारंभिक परीक्षा में। इस परीक्षा के लिए उम्मीदवारों को जिस लिफाफे में रोल नंबर भेजे गए हैं, उस पर एक निजी कोचिंग सेंटर का स्टीकर भी चिपका है। इससे उम्मीदवार संशय में हैं। रोल नंबर का लिफाफा जिनको मिला है, वे यह सोचकर परेशान हैं कि निजी कोचिंग सेंटर की पब्लिसिटी का असल माजरा क्या है।

54 पदों के लिए होना है एग्जाम: हरियाणा सिविल सर्विस (ज्यूडिशियल ब्रांच) के 54 पदों को भरने की जिम्मेवारी पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की थी। इसके लिए हाईकोर्ट ने एक सेलेक्शन कमेटी एचसीएस (ज्यूडिशियल ब्रांच) का गठन किया हुआ है। इस परीक्षा को कंडक्ट कराने की जिम्मेवारी भी इसी कमेटी के पास है। इस परीक्षा के लिए कमेटी ने 14 अक्टूबर को एक प्रारंभिक परीक्षा लेने का फैसला लिया था। इस परीक्षा के लिए कमेटी ने लगभग 4300 उम्मीदवारों को हाल ही में रोल नंबर भेजे हैं। हाईकोर्ट द्वारा भेजे रोल नंबरों पर ही कोचिंग सेंटर के स्टीकर देखकर उम्मीदवार काफी हैरान और परेशान हैं।

दूसरी और सोमवार को इस तरह के स्टीकर लगे कुछ रोल नंबरों के लिफाफों को जब चीफ जस्टिस विजेंद्र जैन को दिखाया गया तो वह भी हैरान रह गए। उन्होंने हाईकोर्ट कमेटी द्वारा भेजे गए रोल नंबर के लिफाफों पर ऐसे स्टीकर लगाने को गंभीरता से लिया है। उन्होंने सेलेक्शन कमेटी के चेयरमैन जस्टिस ग्रेवाल का ध्यान इस मामले की तरफ दिलाया। मामले के बारे में जब हाईकोर्ट स्थित पोस्ट ऑफिस के इंचार्ज से बात की गई तो उनका कहना था कि हमारे पास तो विभाग के उच्चधिकारी का फोन आया था, उन्होंने ही हमें रोल नंबरों की रजिस्ट्री के साथ स्टीकर लगाने के आदेश दिए थे। कोचिंग इंस्टीट्यूट के संचालक का कहना था कि उनकी तो स्टीकर लगाने के बारे में पोस्टल डिपार्टमेंट के साथ डील हुई है।

हमने ऐसे किसी संस्थान को कोचिंग के लिए अधिकृत नहीं किया है। यह जरूर किसी की शरारत है। हाईकोर्ट का ऐसे संस्थान से कोई लेना-देना नहीं है। —जस्टिस केएस ग्रेवाल, चेयरमैन सेलेक्शन कमेटी एचसीएस (ज्यूडिशियल ब्रांच)





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