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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. गांधीयन स्टडीज डिपार्टमेंट (पीयू) के स्टूडेंट्स की नजर में गाधी जी और गांधीयन स्टडीज का क्या महत्व है, प्रोफेशनल लाइफ में गांधीयन स्टडीज कितने काम आती है और प्रोफेशन के तौर पर पीयू का यह कोर्स कितना महत्व रखता है?
इस बारे में गांधीयन स्टडीज के स्टूडेंट्स ने अपने विचार भास्कर के साथ शेयर किए। गांधी जयंती के मौके पर स्टूडेंट्स से यह भी जाना कि गांधीयन स्टडीज में उनका फ्यूचर कितना ब्राइट है।
अमेरिका में 120 जगह गांधीयन स्टडीज पढ़ाई जाती है, जबकि भारत में केवल 20 जगह। यूनाइटेड नेशंस ने भी 2 अक्टूबर को नॉन वॉयलेंस डे के रूप में मनाने का फैसला किया है। दूसरे देशों के लोगों में गांधी जी के प्रति जो निष्ठा है, वह भारत में नहीं। गांधीयन स्टडीज को स्कूल लेवल पर ही अनिवार्य कर देना चाहिए। बच्चों को शुरू से ही सत्य और अहिंसा की शिक्षा देनी चाहिए। -सुशांत देष्टा
किसी को जबरदस्ती गांधी जी के सिद्धांतों पर नहीं चलाया जा सकता। यह हम पर निर्भर है कि हम किन सिद्धातों पर चलना चाहते हैं और किसे अपना आइडल बनाना चाहते हैं। -गगनदीप िसंह
गांधीयन स्टडीज करने के बाद सबसे बड़ा रास्ता एनजीओ में जॉब के लिए खुलता है। आज देश में करप्शन, वॉयलेंस और अनइंप्लॉॅयमेंट फैली हुई है। महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर थोड़ा सा भी चलें, तो वह हर चीज पाई जा सकती है, जिसे पाना मुश्किल है। -सुमन पुष्करना
गांधीयन स्टडीज से और कोई फायदा हो या न हो पर इससे व्यक्ति की सेल्फ प्यूरीफिकेशन जरूर हो जाती है। गांधी के सिद्धांतों पर बोलने के लिए तो सभी तैयार रहते हैं पर उन पर चलना लोगों के बस की बात नहीं। देश को जागरूक बनाने के लिए लोगों को फिर से गांधी के पद्चिन्हों पर चलना होगा। -राजकुमार रावल
क्या कहते हैं गुरु
गांधीयन स्टडीज का स्कोप अब बढ़ रहा है, क्योंकि इसमें ह्यूमन राइट्स और पीस स्टडीज जैसे सब्जेक्ट्स की इंटरनेशनल लेवल पर काफी डिमांड है। स्टूडेंट्स एनजीओज और रूरल डवलपमेंट वाली जॉब्स के लिए आसानी से क्वालीफाई कर जाते हैं। इस स्टडी का फ्यूचर काफी ब्राइट है। -डॉ जेएन शर्मा, चेयरमैन, गांधीयन स्टडीज, पीयू
एनजीओ में इसका स्कोप काफी है। आईएएस की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए यह फायदेमंद है। यह स्टडी इंटरनेशनल लेवल पर बहुत काम आती है। -डॉ. आशू पसरिचा, लैक्चरार, गांधीयन स्टडीज